मध्य प्रदेश

जबलपुर के सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, होटल में भर्ती कर किया जा रहा था इलाज आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज …

भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। प्रदेश के जबलपुर में राइट टाउन स्थित सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल द्वारा आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को होटल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। यहां न तो अस्पताल जैसी सुविधा थी और न ही संसाधन। बिना संसाधन होटल के एक-एक कमरे में दो-दो मरीजों को भर्ती किया गया था। इस बात का खुलासा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की छापामार कार्रवाई में हुआ है। पुलिस की छापामार कार्रवाई से अस्पताल व होटल में भर्ती मरीजों में हड़कंप मच गया।

यह कार्रवाई शिकायत मिलने पर की गई। दरअसल, जबलपुर एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा को शिकायत प्राप्त हुई थी कि डॉ. अश्विनी कुमार पाठक द्वारा संचालित सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल राइट टाउन में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को भर्ती कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को अस्पताल के बाजू में बेगा होटल में भर्ती किया गया है। इसके बाद पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी ने संयुक्त रूप से बेगा होटल और अस्पताल में छापा मारा।

अस्पताल के बाजू में बने 3 मंजिला होटल में भर्ती मिले 35 मरीज

एएसपी गोपाल खांडेल ने बताया कि पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम जब होटल बेगा पहुंची तो वहां कुल 35 मरीज भर्जी मिले। मरीजों के लिए होटल के प्रथम तल पर एक हाल में आईसीयू वार्ड बनाया गया था। दूसरी मंजिल पर जनरल वार्ड एवं तीसरी मंजिल में 10 कमरे निजी कमरे के रूप में उपयोग कर मरीजों को भर्ती किया गया था। प्रारंभिक पूछताछ में सभी आयुष्मान कार्डधारी पाए गए।

अस्पताल में भर्ती थे 42 मरीज, ज्यादातर आयुष्मान कार्डधारी

श्री खांडेल ने बताया कि छापामार कार्रवाई के दौरान सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में 42 मरीज भर्ती मिले। अस्पताल एवं होटल को मिलाकर कुल 77 मरीज भर्ती पाए गए हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज आयुष्मान कार्डधारी थे। अस्पताल स्टाफ ने पूछताछ में बताया कि अस्पताल में आयुष्मान योजना के मरीजों के अलावा सीजीएचएस के मरीज भी भर्ती किए जाते हैं। 77 मरीजों में से कुछ सीजीएचएस के मरीज भी हो सकते हैं, इसका पता लगाया जा रहा है।

सुरक्षा नियमों की भी खुलेआम की जा रही थी अनदेखी

अस्पताल द्वारा जिस होटल बेगा में मरीजों को भर्ती कर उपचार करने का दावा किया जा रहा है, उसमें मरीजों की सुरक्षा से संबंधित इंतजाम और उपकरण भी नहीं थे। बताया जा रहा है कि होटल बेगा भी डॉ. अश्विनी कुमार पाठक का ही है, जिसे कोविड काल से अस्पताल के रूप में उपयोग किया जाने लगा। आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी का कहना है कि होटल में मरीज को भर्ती कर इलाज नहीं किया जा सकता। कोविड काल में जरूर होटलों और अस्पतालों का समन्वय बनाते हुए कोरोना मरीजों को होटल के कमरों में आइसोलेशन की परमीशन दी गई थी। बेगा होटल में मरीजों को रखने की परमीशन है कि नहीं, इसकी जांच की जा रही है।

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