मध्य प्रदेश

दमोह में बिना पंजीयन के चल रहा था मिशनरी हास्टल, धर्मांतरण भी करवाता था, 10 लोगों पर प्रकरण दर्ज …

भोपाल। मध्य प्रदेश के दमोह में ईसाई मिशनरी द्वारा बिना पंजीयन के ही छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। यही नहीं, इस छात्रावास का संचालन करने वाले लोग यहां रहने वाले बच्चों का धर्मांतरण भी कराते थे। यह खुलासा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने किया है। मामला उजागर होने के बाद उनके आदेश पर इस कार्य में लगे 11 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो व सदस्य ओकर सिंह ने दमोह के ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित छात्रावासों का निरीक्षण किया। इसमें धर्मांतरण का मामला सामने आने पर श्री कानूनगो द्वारा दमोह देहात थाना में 10 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया है। श्री कानूनगो के मुताबिक उन्होंने जिले के तीन छात्रावासों का निरीक्षण किया। इसमें अनेक प्रकार की कमियों के चलते पूछताछ की गई और रिकार्ड की जांच की गई।

इसमें भड़ा भारी स्थित मिड इंडिया क्रिश्चियन मिशन द्वारा संचालित बाल ग्रह के निरीक्षण के दौरान वहां के स्टाफ ने मेन गेट का ताला लगा दिया। अंदर से रेलिंग शटर एवं चैनल गेट को बंद कर दिया। इसके बाद भी टीम ने अंदर पहुंचकर जांच की। उन्होंने बताया कि इस छात्रावास में 91 बच्चे रहते हैं, लेकिन मौके पर आयोग की टीम को 45 बच्चे मिले। यहां अधिकांश बच्चे हिंदू हैं। टीम द्वारा पूछताछ करने पर पाया गया कि यहां पर बच्चों को क्रिश्चियन धर्म की शिक्षा दी जा रही है।

श्री कानूनगो ने बताया कि जब निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम बाइबिल सोसाइटी का निरीक्षण करने पहुंची, तब वहां पर डिंडोरी निवासी एक 17 वर्षीय बालक ने बताया कि वह यहां पादरी बनने का प्रशिक्षण ले रहा है। नाबालिग बच्चे को बहला-फुसलाकर और उसे पढ़ाई से विमुख़ कर इस तरीके से लाकर रखा जाना प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए इस मामले में उन्होंने दमोह देहात थाने में मोनीलाल, आरडी लाल,शीला लाल, मंजू बनवास, विवेक लाल, शनित लाल, जेके हैनरी, अरनिष्ट, एंजेला अजय लाल के विरुद्ध मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 और 5 भारतीय दंड संहिता की धारा 370 एवं जेजे एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है।

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