नई दिल्ली

ई-नाम प्रणाली के विरोध में 19 सितंबर से हरियाणा में अनिश्चितकाल तक बंद रहेंगी मंडियां ….

नई दिल्ली। हरियाणा में ई-नाम प्रणाली के विरोध में 19 सितंबर से राज्य की मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल रहेगी। हड़ताल के दौरान मंडियों में किसी प्रकार की फसल की बोली या खरीद नहीं होगी। सरकार ई-नाम प्रणाली के तहत कम्प्यूटर द्वारा अनाज मंडियों में फसल खरीद करेगी जो बहुत ही जटिल प्रक्रिया है, इसलिए व्यापारी हड़ताल कर रहे हैं। आढ़ती एसोसिएशन सिरसा मंडी के प्रधान मनोहर मेहता ने यह जानकारी व्यापारियों की शनिवार को हुई एक बैठक के बाद दी।

मेहता ने बताया कि इस दौरान कोई लेन-देन भी नहीं होगा, इसलिए किसानों से अपील की है कि सभी किसान 19 सितंबर से मंडियों में अपनी फसल लेकर न आएं ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सिरसा जिले की सात मंडियों के प्रधानों की एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला के प्रधान सुरेंद्र मिचनाबादी ने की, जिसमें सभी मंडियों के प्रधानों व अन्य आढ़तियों ने हड़ताल का समर्थन किया।

सुरेंद्र मिचनाबादी ने कहा कि सरकार आढ़तियों की मांगों को लेकर हठधर्मिता अपनाए हुए है तथा आढ़तियों के व्यापार को बर्बाद करने पर तुली हुई है। ई-नाम (e-NAM) प्रणाली तर्कसंगत नहीं है। इससे आढ़तियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जिला प्रधान ने कहा कि 10 सितंबर की गोहाना रैली में प्रदेशभर के आढ़तियों ने फैसला लिया था कि 17 सितंबर तक सरकार ने यदि आढ़तियों की मांगों को नहीं माना तो 19 सितंबर से प्रदेश की मंडियां अनश्चितिकाल के लिए बंद की जाएंगी तथा मार्केट कमेटियों के आगे धरना होगा।

सिरसा में भी मार्केट कमेटी कार्यालय के आगे सुबह 11 से 2 बजे तक धरना दिया जाएगा। बैठक में डबवाली प्रधान गुरदीप कामरा, कालांवाली प्रधान राकेश कुमार, ऐलनाबाद प्रधान जय सिंह गोरा, सिरसा प्रधान मनोहर मेहता, आढ़ती एसोसिएशन सिरसा के सचिव दीपक मत्तिल, कोषाध्यक्ष कुणाल जैन, सुनील कुमार और महावीर शर्मा भी मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा निरंतर व्यापारियों के हित के खिलाफ फैसले लिए जा रहे हैं और चंद बड़े औद्योगिक घरानों को राहत के नाम पर खुली छूट दी जा रही है। इसी कड़ी में एक और नया तुगलकी फरमान हरियाणा सरकार की गठबंधन सरकार ने ई-नाम खरीद लागू करने का निर्णय लिया है। खरीदार व्यापारी को माल उठाने से पहले खरीदे हुए माल की ई-पेमेंट सीधे किसानों के खातों में जाएगी, जिससे अन्नदाता को तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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