मध्य प्रदेश

एमपी के पूर्व आईएएस वरदमूर्ति मिश्रा ने बनाई राजनीतिक पार्टी, वास्तविक भारत पार्टी होगा नाम, कहा- सरकार ने कष्ट के अलावा कुछ नहीं दिया ….

भोपाल। सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले आईएएस वरदमूर्ति मिश्रा ने आखिर पॉलिटिक्स में एंट्री कर ली। वास्तविक भारत पार्टी (वाभापा) के नाम से नई पॉलिटिकल पार्टी बनाकर उन्होंने घोषणा की है कि अगले साल होने वाले मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारेंगे। नई पार्टी बनाने के साथ ही पूर्व आईएएस मिश्रा ने प्रदेश के लोगों के नाम संदेश भी लिखा है। इसमें कहा है कि सरकार ने कष्ट के अलावा कुछ नहीं दिया है।

अपन संदेश में वरदमूर्ति मिश्रा ने लिखा है- ‘मैं और मेरे सभी साथी अब एक राजनीतिक पार्टी के रूप में आपकी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। हम एक बहुत ही बेहतर शासन व्यवस्था, रोजगार का बड़े पैमाने पर सृजन, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल के साथ-साथ राशन की बेहतर उपलब्धता के लिए समर्पित होकर काम करना चाहते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता के बिना सुखी और संपन्न जीवन असंभव है।‘ उन्होंने कहा है- ‘ सरकारों ने आपको कष्ट के अलावा कुछ नहीं दिया है। कृपया अच्छे, समझदार और विनम्र लोगों को अवसर दीजिए कि वे आपकी सेवा कर सकें। शीर्ष पर जब तक कोई तकनीकी समझ, समस्याओं का हल जानने वाला नहीं बैठेगा, तब तक हम केवल वोट देते रहेंगे, सरकार बनाते रहेंगे, पर समाज जहां का तहां रह जाएगा।‘ मिश्रा ने अपने संदेश में आगे लिखा है- ‘एक पीढ़ी इस विसंगति में ही बर्बाद होकर निकल गई है। अब दूसरी पीढ़ी भी दांव पर लगने वाली है। कृपया स्वयं एवं समाज के भविष्य पर चिंतन करिए। हम कब तक प्रतीक्षारत रहें। अब समय आ गया है कि हम नए तरीके और व्यवस्था को स्थान दें।‘

करीब पांच माह पूर्व वरदमूर्ति मिश्रा ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के दो माह बाद उन्होंने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता में शीर्ष पर बैठे लोगों की प्रशासनिक समझ में कमी और दूरदर्शिता के अभाव के कारण आज पूरे मध्यप्रदेश का विकास बाधित हो रहा है। वर्तमान सरकार तो हर मोर्चे पर विफल है। उन्होंने कहा था कि पिछले 5-6 साल से मेरे मन में उथल-पुथल मची थी। 26 साल की अपनी नौकरी के दौरान 13-14 जिलों में रहा हूं। गांवों में जो परेशानियां देखीं, उन्हें दूर करने के लिए राजनीतिक दल की शुरूआत करूंगा। उन्होंने शिवराज सरकार पर हमला करते हुए कहा  था कि सिस्टम में रहकर भी अफसर अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित नहीं कर पा रहे हैं। ब्यूरोक्रेट्स की बात सुनने के बजाए सरकार सिर्फ ईवेंट पॉलिटिक्स कर रही है। उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश बीज का नकली हब बन गया है। देश में सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में कंज्यूमर फोरम में नकली बीज के केस दर्ज हैं। यही हाल फर्टिलाइजर का है। संगमरमर का चूरा और फ्लाई ऐश मिलाकर इसकी सप्लाई हो रही है। सरकार के पास इसकी चेकिंग की कोई व्यवस्था नहीं है।

वरदमूर्ति ने कहा था कि वर्तमान में राजनीतिक परिस्थितियां बहुत ही निराशाजनक हो चुकी हैं। सत्ता में शीर्ष पर बैठे लोगों की प्रशासनिक समझ में कमी और दूरदर्शिता के अभाव के कारण आज पूरे मध्यप्रदेश का विकास बाधित हो रहा है। किसी भी सरकार ने जनता से जुड़े मूल मुद्दों पर काम नहीं किया। वर्तमान सरकार तो हर मोर्चे पर विफल है। मध्यप्रदेश के किसान संकट में हैं। शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल है। बेरोजगारी बढ़ रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। जनता आज पीने का पानी और बिजली संकट से जूझ रही है। लेकिन, सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।

वरदमूर्ति मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2014 बैच के पूर्व अधिकारी हैं। इससे पहले वे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। 1996 में राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चयनित होने के बाद डिप्टी कलेक्टर बने थे। वरदमूर्ति मिश्रा ने आम लोगों के बीच में जाकर काम करके अपनी अलग ही छवि बनाई थी, वे लोगों में काफी लोकप्रिय हो गए थे। वे मध्यप्रदेश के जिस जिले में पदस्थ रहे, वहां जनता उनसे सीधे जुड़ जाती थी। लोगों को उनसे मिलने में कोई परेशानी नहीं आती थी। वे जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर, उप सचिव पद तक रहे। इस्तीफा देने से पहले वे भोपाल में खनिज निगम में कार्यकारी निदेशक के पद पर पदस्थ थे।

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