मध्य प्रदेश

भोपाल में बच्ची से निजी स्कूल बस में रेप मामले में बिलापॉन्ग स्कूल के चेयरमैन और प्रिंसिपल समेत 4 पर एफआईआर …

भोपाल। बिलापॉन्ग स्कूल की बस में बच्ची से रेप के मामले में स्कूल के चेयरमैन और प्रिंसपल समेत 4 लोगों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। चारों के खिलाफ धारा 188, पाक्सो एक्ट-21 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। 188 का केस बस में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के उल्लंघन पर दर्ज किया गया है। जबकि पाक्सो सेक्शन-21 अपराध को दबाने के आरोप में दर्ज किया गया है।

इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के निजी स्कूल की बस में साढ़े तीन साल की बच्ची से रेप के मामले में गुरुवार को भोपाल पुलिस कमिश्नर को तलब किया। सीएम ने कहा- ये बिल्कुल नहीं चलेगा कि कोई प्रभावशाली व्यक्ति है तो हम बात भी नहीं करेंगे, सभी को बुलाइए। स्कूल प्रबंधन को बुलाएं और कड़ी कार्रवाई करें। यह कोई साधारण घटना नहीं है। कितना भी बड़ा स्कूल हो, जवाबदार है। कितनी जल्दी सजा हो सकती है देखिए…।

सीएम की कड़ी हिदायत के बाद पुलिस आई एक्शन में

बैठक के बाद पुलिस भी एक्शन में आ गई है। दोपहर में SIT की टीम पिछले गेट से स्कूल के भीतर दाखिल हुई। एक के बाद एक 3 गाड़ियों से अधिकारी पहुंचे। SIT की टीम ने स्कूल बस का जीपीएस डाटा जब्त कर लिया है। पुलिस अब एनालिसिस करेगी कि आरोपी ड्राइवर ने चलती गाड़ी में वारदात को अंजाम दिया या फिर गाड़ी खाड़ी करके। वैसे, पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने चलती गाड़ी में हरकत करना बताया था। इसके साथ ही ड्राइवर व महिला केयर टेकर की भर्ती प्रोसिजर के दस्तावेज भी लिए हैं।

मामले को दबाने में जुटा रहा स्कूल प्रबंधन

वहीं, एडिशनल डीसीपी श्रुतिकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि महिला थाना पुलिस ने स्कूल के चेयरमैन नजम जमाल, डायरेक्टर ऑपरेशन फैजल अली, प्रिंसिपल आशीष अग्रवाल और ट्रांसपोर्ट मैनेजर सैय्यद बिलाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। चारों के खिलाफ धारा 188, पाक्सो एक्ट-21 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। 188 का केस बस में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के उल्लंघन पर दर्ज किया गया है। जबकि पाक्सो सेक्शन-21 अपराध को दबाने के आरोप में दर्ज किया गया है। घटना के बाद स्कूल बसों में सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाए हैं। स्कूल की सभी बसों में एक महिला टीचर को तैनात किया गया है। यह टीचर बस के सबसे आगे वाली सीट पर बैठी नजर आईं। इसके साथ ही कई पेरेंट्स खुद ही बच्चों को लाते-ले जाते नजर आए। पुलिस भी प्रशासन के साथ मिलकर बसों की चेकिंग कर रही है।

बच्ची से ड्राइवर ने कई बार की थी ज्यादती

इधर, मप्र बाल आयोग ने इस मामले में एक और बड़ा खुलासा किया है। आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान के अनुसार बिलाबॉन्ग स्कूल में पढ़ने वाली साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ बस ड्राइवर ने एक बार नहीं, बल्कि कई बार ज्यादती की थी। इसके अलावा दो और बच्चियों के भी बस में अलग-अलग दिन कपड़े बदले जा चुके हैं। आयोग ने गुरुवार को स्कूल पहुंचकर प्रबंधन, टीचर, कर्मचारियों और प्रिंसिपल सहित 20 लोगों से 8 घंटे तक पूछताछ की। इसमें यह बात सामने आई है। बस में दो अन्य बच्चियों के भी कपड़े बदले गए थे। इसकी जानकारी ड्राइवर, टीचर, आया को भी थी।

घटना के बाद सीसीटीवी का डीबीआर कार्ड नष्ट किया गया

चौहान ने कहा कि बस में बच्चियों के साथ हो रहे अन्याय की जानकारी सभी को थी, लेकिन किसी ने ठोस कदम नहीं उठाया। फिलहाल आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी को जांच नए सिरे से करने और संबंधित कर्मचारियों, टीचर, दीदी के मोबाइल फोन जब्त कर जांच करने के भी आदेश दिए हैं।  चौहान के अनुसार पूछताछ में आयोग को पता चला कि जिस बस में दुष्कर्म हुआ, उसमें लगे सीसीटीवी का डीबीआर कार्ड मामले को दबाने के लिए गायब कर नष्ट कर दिया गया। इसकी जानकारी भी कई कर्मचारी और टीचर के पास थी।

सभी बच्चियों की काउंसलिंग करने के निर्देश

बाल आयोग ने मामले में एसआईटी, पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारियों को बस में जाने वाली सभी बच्चियों की काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग भी सभी बच्चियों के पैरेंटस से संपर्क करके अलग से काउंसलिंग कर तथ्यात्मक जानकारी जुटाएगा, ताकि बच्चियों के साथ होने वाले हादसे के बारे में सही जानकारी निकलकर सामने आए।

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