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कोरोना काल में वरदान के रूप में परिवारिक अंतर संबंधों का विकास हुआ – डॉक्टर निमीश गुप्ता

कोरबा। व्याख्याता राकेश टंडन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उतरदा के प्रयासों तथा जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडे के मार्गदर्शन में कोरबा जिला के शिक्षक शिक्षिकाओं ने छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कोरोना जागरूकता अभियान कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यशाला में कोरोना काल में तनाव प्रबंधन के बारे में जानकारी प्राप्त की।

 कार्यक्रम के प्रमुख प्रवक्ता डॉक्टर निमीश गुप्ता, मनोवैज्ञानिक छत्तीसगढ़ ने बताया कि परीक्षा के समय विद्यार्थियों में कुछ मात्रा में तनाव का होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है परंतु वर्तमान कोरोना काल में परीक्षार्थी दोहरे तनाव में हैं एक तो वर्ष भर से स्कूल बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई करके किसी तरह कोर्स पूरा कराया गया परंतु फिर भी विद्यार्थियों में आत्मविश्वास कम हुआ है।

 वहीं कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच परीक्षा देना भी उनको तनाव दे रहा है। इस पर वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों तथा अन्य सभा की युवा की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया ग्रामीण विद्यार्थी जिनके आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई तथा परीक्षाओं का स्थगित होना उनके अंदर तनाव उत्पन्न करता है। दसवीं के बाद कौन से विषय लें इसके चयन में भी उनको असमंजस की स्थिति रहती है। उसी तरह 12वीं के विद्यार्थियों को मेडिकल एंट्रेंस महाविद्यालयों में प्रवेश तथा इंजीनियरिंग में प्रवेश संबंधी प्रोसेस को लेकर तनाव रहता है।

कोरोना काल के इस समय इन छात्र-छात्राओं को के सहयोग के लिए शिक्षक के साथ पालकों को भी सामने आना चाहिए। हमें विद्यार्थियों के साथ विनम्र एवं मित्रवत व्यवहार करते हुए उनसे सतत संपर्क कर वार्तालाप करना चाहिए। विद्यार्थियों को उनके पूर्व निर्धारित समय सारणी अनुसार कार्य करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। विद्यार्थियों को यह भी प्रेरित करना चाहिए कि वह रात्रि कालीन अधिक समय तक ना जगे. सभी स्कूलों के कुछ शिक्षकों को काउंसलर की तरह कार्य कर उनके अंदर की स्ट्रेस दूर करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. विद्यार्थियों को घर में ही रहकर व्यायाम करने। बागवानी का कार्य करना। पेंटिंग करना गायन तथा नृत्य सीखने के लिए प्रेरित करना तथा बीच-बीच में इस संबंध में ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन कराना भी चाहिए। इससे विद्यार्थियों के अंदर जो तनाव है वह कम होगी।

कोरोना काल के इस समय में माता पिता के साथ ही साथ परिवार के वरिष्ठ सदस्य दादा दादी तथा नाना नानी की विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए जिम्मेदारियां बढ़ जाती है. विद्यार्थियों को भी उनके साथ अच्छे संबंध बना करके उनका देखभाल करने का दायित्व बढ़ता है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि हमको अपना व्यवहार एक गिला पेपर की तरह रखना चाहिए ना कि सूखा पेपर की तरह। गिला पेपर के समीप यदि माचिस की तिली जलाकर लाए तो जलता नहीं बल्कि माचिस की तीली बुझ जाती है। जबकि सूखा पेपर के पास अभी हम एक माचिस की तीली जला कर लाए तो वह जल जाती है।

कोरोना काल में आम नागरिकों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मास्क लगाकर बाहर जाना चाहिए। समय-समय पर हाथों में सैनिटाइजर लगाना चाहिए। सोसल डिस्टेन्सिन्ग के नियमों का पालन करना चाहिए. बाहर घर आए तो समस्त कपड़े को साफ करना चाहिए तथा हाथों को साबुन से धोना चाहिए। दिन में बार-बार हमको साबुन से हाथ धोना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमको हमारे अंदर की डीप्रेस की तुलना में टोलरेंस को अधिक प्रबल बना कर रखना चाहिए। इसके लिए हम को सकारात्मक सोच रखना चाहिए। उन्होंने टीकाकरण अधिक से अधिक कराने के लिए भी प्रेरित किया। टीकाकरण कराने के बाद भी हमको कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए क्योंकि टीकाकरण कराने से उस व्यक्ति के अंदर तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है लेकिन वह कोरोना जैसे वायरस के लिए वाहक की तरह कार्य कर सकता है। जिससे कोरोना की फैलने की संभावना बढ़ जाती है।

कार्यक्रम में कोरबा जिला से शिक्षा विभाग के व्याख्याता राकेश टंडन, लखन लाल धीवर, महावीर चंद्रा, निशा चंद्रा, प्रकाश पडवाल, तारा सिंह कृष्णा रजवाड़े, कल्पना, प्रभा साव, प्राचार्य सिल्ली, प्राचार्य सुखदेव डिन्डोरे, प्राचार्य जयश्री माहौलकर, प्रभारी प्राचार्य ललिता साहू, प्राचार्य ज्योति शुक्ला, प्राचार्य विवेक लांडे, डॉक्टर तृप्ति विश्वास. अनामिका चक्रवर्ती सदस्य छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा अंबिकापुर, हेमंत खुटे पिथौरा, सुनील कुमार साहू कांकेर, आलोक शर्मा रायपुर, डॉक्टर वायके सोना कोरबा, अनुपम जोनेफर कांकेर, निधि सिंह कोरबा, रतन जी रायपुर, अंजू मेश्राम रायपुर, अजय कुमार भोई गढ़फुलझर, आदित्य सिंह पाली, अविनाश यादव कोरबा, विश्वास मेश्राम रायपुर ने के साथ कोरबा जिला के अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं तथा छात्र छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर एमआर नायक तथा प्रस्तावना वाचन डॉक्टर तृप्ति विश्वास विभाग अध्यक्ष मनोविज्ञान राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर द्वारा किया गया।

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