मध्य प्रदेश

पीडब्ल्यूडी विभाग में इंजीनियर, बाबू और ठेकेदारों ने किया करोड़ों का खेल ….

भोपाल. मध्यप्रदेश के पीडब्ल्यूडी विभाग में इंजीनियर, बाबू और ठेकेदारों के गठजोड़ द्वारा करोड़ों का खेल करने का मामला उजागर हुआ है। जांच में खुलासा हुआ है कि इंजीनियर और बाबू ठेकेदारों से मिलकर करोड़ों की सुरक्षा गारंटी राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) उन्हें वर्क ऑर्डर के बाद वापस कर देते थे। यह खेल करीब तीन वर्षों से चल रहा था। ऐसी गड़बड़ी प्रदेश के अन्य जिलों में भी होने की आशंका है।

दरअसल, पीडब्ल्यूडी निर्माण और इलेक्ट्रिक सहित अन्य काम जब ठेकेदारों को आवंटित करता है तो पहले ठेकेदारों से वर्क ऑर्डर राशि का 5 फीसदी हिस्सा उन्हें बतौर सिक्योरिटी सरकार के खजाने में एफडी के तौर पर रखनी पड़ती है। यह कवायद इसलिए की जाती है, ताकि काम में गड़बड़ी, खराबी या आधे-अधूरे काम छोडऩे पर ठेकेदारों की एफडी को राजसात कर राशि वसूल ली जाए। यह राशि दो से तीन वर्षों के लिए ठेकेदारों से जमा कराई जाती है। गारंटी पीरियड समाप्त होने के बाद राशि संबंधित ठेकेदार को लौटाने का नियम है।

नाराज ठेकेदारों ने ही खोली पोल

आरोप है कि इंजीनियर और बाबू लेन-देन कर कुछ ठेकेदारों की एफडी वापस कर देते थे। कुछ की गारंटी अवधि समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं करते। परेशान ठेकेदारों ने लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत की थी। मंत्री कार्यालय और ईएनसी ऑफिस में भी शिकायत हुई। इसके बाद प्रारंभिक जांच में यह गड़बड़ी उजागर हुई है। शिकायत में सोनी इलेक्ट्रिकल्स, सागर एसोसिएट, विश्वकर्मा इन्फ्रास्ट्रक्चर और पलाश इलेक्ट्रिकल्स फर्म की एफडी वापस किए जाने के तथ्य सामने आए हैं। लोक निर्माण विभाग मंत्री गोपाल भार्गव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी है।

ढाई वर्ष से निकाला जा रहा कर्मचारियों का अतिरिक्त वेतन

ठेकेदार यहां इंजीनियरों और बाबुओं से मिलकर वर्क ऑर्डर जारी होने के तुरंत बाद एफडी वापस हासिल कर लेते थे। उस एफडी को ठेकेदार अपनी आय बताते हुए उसी के आधार पर दूसरे ठेके लेते थे। इसी कार्यालय में वेतन का घोटाला हुआ है। बाबू और कम्प्यूटर ऑपरेटर मिलीभगत कर ढाई वर्ष से कर्मचारियों का अतिरिक्त वेतन निकाल रहे थे। मामला कोरोना काल का है। करीब 70 कर्मचारियों का सवा करोड़ के आस-पास अतिरिक्त निकाला गया। खुलासे के बाद ऑपरेटर और कर्मचारियों से रिकवरी की जा रही है।

जांच टीम गठित, सामने आईं गड़बडिय़ां

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री अरविंद चौहान का इस संबंध में कहना है कि मैं तो 12 दिन पहले डिवीजन में आया हूं। यह मेरे आने के पहले का मामला है। इस मामले में ईएनसी ऑफिस ने एक जांच टीम गठित कर दी है। इससे ज्यादा मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। पीडब्ल्यूडी के एसई एवं जांच टीम के अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रारंभिक दस्तावेजों की छानबीन में गड़बडिय़ां सामने आई हैं। जांच चल रही है, रिपोर्ट मुख्य अभियंता को सौंपी जाएगी। गड़बडिय़ों के संबंध में टीम को बताना उचित नहीं है।

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