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भारतीय जनता पार्टी को रायपुर में मिला है एक से अधिक प्लाट, कोर्ट में कांग्रेस का जवाब- मोदी सरकार ने भी बनाई है राजनीतिक पार्टियों को सस्ती जमीन देने की नीति …

बिलासपुर । जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की डिवीजन बेंच में गुरुवार को हुई। इस दौरान कांग्रेस पार्टी की तरफ से एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव, सिद्धार्थ शुक्ल और मानस वाजपेई ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर सिलसिलेवार जवाब दिया और बताया कि जिला कांग्रेस कमेटी को पुराना बस स्टैंड की 35 हजार 453 वर्गफुट जमीन देने वाली याचिका तथ्यहीन है। कैबिनेट ने शासन के नियमों के तहत जमीन का आवंटन किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से कहा कि हॉस्पिटल की जमीन पर कांग्रेस भवन नहीं बन रहा है। बल्कि आवंटित जमीन पर हॉस्पिटल पहले ही बन चुका है, जहां जिला अस्पताल संचालित है।

बिलासपुर में जिला कांग्रेस भवन के लिए भूमि आवंटन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर कांग्रेस पार्टी ने अपना जवाब दाखिल किया है। इसमें कहा है कि भाजपा को भी रायपुर में पार्टी कार्यालय के लिए एक से अधिक प्लाट दिया गया है। राजनीतिक पार्टियों को सस्ती दर पर जमीन देने के लिए नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने भी नीति बनाई है। ऐसे में यह याचिका तथ्यहीन है।

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह बात नहीं बताई है कि भूमि का आवंटन राज्य शासन की कैबिनेट के निर्णय से किया गया है और नियमों के तहत ऐसे मामले में कैबिनेट को निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि भाजपा को भी रायपुर में एक से अधिक प्लाट पार्टी कार्यालय के लिए दिया गया है। राजनीतिक पार्टियों को सस्ती कीमत पर जमीन देने की नीति खुद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बनाई है।

कांग्रेस कमेटी के अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि राजनैतिक पार्टियों की तुलना अन्य किसी संस्था या संगठन से नहीं की जा सकती। क्योंकि यह लोकतंत्र के लिए आवश्यक है और इन्हे वोट डालने वाले सारे लोगों और समर्थको की और से अपनी गतिविधियां संचालित करते है, जिसके उचित क्रियान्वयन के लिए इन्हें कार्यालय भवन की आवश्यकता होती है, जो कि समय के साथ बढती है। इसलिए दूसरा प्लाट दिया जाना उचित है।

डिवीजन बेंच ने कांग्रेस कमेटी के जवाब और तर्कों को सुनने के बाद प्रत्युत्तर देने के लिए याचिकाकर्ताओं को तीन सप्ताह का समय दिया है। साथ ही नगर निगम बिलासपुर को भी एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से प्रकरण में पहले ही जवाब आ गया है। अब इस केस की अगली सुनवाई 16 फरवरी को नियत की गई है।

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