मध्य प्रदेश

एमपी में विधानसभा चुनाव से पूर्व 3 लाख कार्यकर्ता तैयार करेगी आम आदमी पार्टी, आप के मध्यप्रदेश प्रभारी मुकेश गोयल बोले- एमपी में सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे …

भोपाल। दिल्ली और पंजाब में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी की नजरें अब मध्य प्रदेश पर हैं। यहां 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी ने ताकत झोंक दी है। इसके चलते पार्टी ने पूरे प्रदेश में वालेंटियर मैपिंग शुरू कर दी है। इसमें नए कार्यकर्ताओं को जोड़ा जा रहा है। अभी तक 60 हजार कार्यकर्ता बनाए गए हैं। विधानसभा चुनाव के पहले तक 3 लाख कार्यकर्ता बनाने का लक्ष्य पार्टी ने तय किया है। पार्टी प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

यह जानकारी पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुकेश गोयल ने दी। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव में उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा जिन पर किसी तरह के आरोप नहीं है, छवि अच्छी है। साथ ही जनता में अच्छी पकड़ है। यह भी कोशिश की जाएगी कि चुनाव से पहले उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाए, जिससे उन्हें प्रचार करने का पर्याप्त मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में जनता तीसरे विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी को देख रही है। भाजपा सरकार में घोटालों की वजह से प्रदेश की जनता नाराज है। कांग्रेस से इस कारण नाराज है कि उसके विधायकों को जनता ने जिताया और वह भाजपा में शामिल हो गए।

गांव स्तर तक कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम होंगे

‘आप” के प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया प्रदेश में 4 अगस्त से वालेंटियर मैपिंग का काम शुरू किया गया है। यह चुनाच तक चलेगा। इसमें पहले तो प्रदेश को 7 जोनों में बांटकर कार्यकता संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके बाद जिला और गांव स्तर तक इस तरह के संवाद होंगे। पार्टी की सदस्यता नि:शुल्क दी जाती है।

नगरीय निकाय चुनाव के बाद उत्साहित है पार्टी

उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रदेश में हुए नगरीय निकाय चुनाव में सिंगरौली में आम आदमी पार्टी की रानी अग्रवाल महापौर चुनी गई हैं। यहां पर 5 पार्षद भी इसी पार्टी के हैं। इसके अलावा पूरे प्रदेश में 45 पार्षद भी नगर निगम और नगर पालिकाओं में इस पार्टी से जीते हैं। करीब 90 सीटों पर पार्षद पद में दूसरे नंबर पर आप रही है। भोपाल और बैरसिया में भी तीन वार्डों में आप प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे।

पार्टी के सामने यह हैं चुनौतियां

  1. –   ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी का नेटवर्क बहुत कमजोर है।
  2. –  शहरी क्षेत्रों में चार से पांच साल पहले पार्टी से कई बड़े चेहर जुड़े थे, लेकिन इनमें कई या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या निष्क्रिय हैं।
  3. –  पार्टी में दूसरे दलों से आए लोग भी शामिल हो रहे हैं, जिसका पुराने कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं।

 

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