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मां नर्मदा की गोद में एक संत बाबा सीताराम …

नर्मदा परिक्रमा भाग – 11

 

अक्षय नामदेव। ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र नर्मदा तट में दर्शन पूजन करने के पश्चात अब हम आगे की परिक्रमा में बढ़ रहे थे। यह इलाका अब लगभग मध्य प्रदेश का सीमावर्ती क्षेत्र है इसलिए लगने लगा था कि क्षेत्र परिवर्तन हो रहा है। इस क्षेत्र में पेड़ पौधे कम ही दिखाई दे रहे थे परंतु खेती समृद्धशाली दिख रही थी। हम खरगोन जिले में थे। यहां खरगोन जिले में नर्मदा का पाट चौड़ा होता गया है। दोपहर के समय गर्मी तेज थी उमस ज्यादा थी। पसीने से हाल बुरा हो रहा था परंतु यात्रा जारी थी। हमारे सह परिक्रमा यात्री घनश्याम सिंह ठाकुर ने जानकारी दी की यहां नर्मदा तट तेली भटियाण घाट में सीताराम बाबा का आश्रम है। वे पहुंचे हुए संत है हमें उनका दर्शन करना चाहिए। हमने उनका अनुसरण किया और उनके हां में हां मिलाते हुए हम तेली भाटियाण घाट की ओर चल पड़े।

मुख्य सड़क छोड़कर अब हम कच्चे रास्ते मे थे। काफी उबड़ खाबड़ दुर्गम रास्तों से होते हुए हम जा रहे थे। रास्ते में जो गांव पड़ रहे थे उनमें जो भी घर थे उनमें छपाई नहीं हुई थी। शायद घर बनाने के बाद वहां छपाई का प्रचलन नहीं है। जैसा भी हो हमारा भारत तो गांवों का ही देश है। काफी घूमने फिरने के बाद हम आखिरकार नर्मदा तट तेली भाटियाण घाट पहुंच गए। नर्मदा का तट काफी ऊंचा है और नीचे दूर तक नर्मदा ही नर्मदा है। यहां नर्मदा का सौंदर्य अद्भुत है। नर्मदा इस तट से उस तट पाटो पाट बह रही है। तट के ऊपर सैकड़ों दुकानें सजी हुई हैं जहां पूजन सामग्री, प्रसाद नर्मदा की फोटो तथा वहां के सीताराम बाबा की फोटो भी दुकानदार सजाए हुए हैं।

तट के ऊपर बाबा सीताराम का आश्रम है। दुकानदारों ने हमसे पूछा आप परिक्रमा वासी हैं? ,,हमने कहा। तब आप ऊपर बाबा के आश्रम चले जाइए। आश्रम में सीताराम की धून चल रही थी। वहां आश्रम के अंदर पहुंचकर देखा तो बाबा सिर झुकाए आने वाले तीर्थ यात्रियों एवं भक्तों को अपने हाथों से प्रसाद वितरण कर रहे हैं। शरीर में एक लंगोटी के अलावा कुछ नहीं है। शारीरिक स्थिति से ही झलक रहा है कि बाबा बहुत बुजुर्ग हो गए हैं इसके बावजूद वे वहां अपने आश्रम में मां नर्मदा की प्रतिमा के सामने बैठे प्रसाद वितरण में लगे हैं। प्रसाद लेने वाले भक्त एवं तीर्थयात्री बाबा के सामने रखी थाली में पैसे चढ़ा रहे हैं वहां कई कार्यकर्ता बाबा के अगल-बगल हैं वे पैसे चढ़ाने वाले भक्तों को बीच-बीच में टोंक रहे हैं कि सिर्फ रुपए चढ़ाई है बाबा 10 रुपएसे ज्यादा नहीं लेते। कई भक्त जो 50 या 100 रुपए चढ़ा रहे थे उन्हें वह पैसा वापस दे दिया जा रहा था।

इस बीच आश्रम के कार्यकर्ताओं ने हमें परिक्रमा वासी जानकर वहां बड़ी भीड़ के बावजूद आदर से बैठाया। हम वहां मूकदर्शक बने बाबा के आसपास की गतिविधियों को देख रहे थे। तभी एक कार्यकर्ता आया और परिक्रमा वासी होने के नाते हमें आश्रम से सेव एवं मुद्रा का मिक्चर, बिस्किट का पैकेट, शक्कर की छोटी पोटली इत्यादि भेंट की। वहां हमें चाय भी पिलाई गई। हम बाबा सीताराम का दर्शन आशीर्वाद लेकर नीचे मां नर्मदा के पास आ गए। वहां नर्मदा तट पर पूजा अर्चना की तथा वहां स्थित पेड़ के नीचे कुछ देर विश्राम किया तथा नर्मदा तट तेली भाटियाण से आगे के लिए निकल पड़े।

सूरज की तेज लपट कुछ ऑकुलता प्रदान कर रही थी बावजूद उसके हम अपनी यात्रा निरंतर जारी किए हुए थे। खरगोन जिले के गावों को पार करते हुए अब हम बड़वानी जिला में प्रवेश कर चुके थे तब तक शाम होने को आई थी। रात्रि विश्राम के लिए अब हमें कहीं आश्रय लेना था। मंडवाना, राजपुर, उपला, पलसूद, निवाली, डोंडवाड़ा होते हुए हम पानसेमल पहुंचे।हमने मार्ग में ही पता किया कि क्या यहां आस-पास कोई मंदिर है जहां हम रुक सके तो मार्गदर्शक ने जानकारी दी कि यहां राधा कृष्ण मंदिर में परिक्रमा वासियों के रहने की व्यवस्था है आप वहां रुक सकते हैं।

बड़वानी जिले के पानसेमल( मेंद्राणा) के श्रीराधा कृष्ण धाम में हम शाम लगभग 6:00 बजे पहुंचे। लगभग डेढ़ एकड़ में स्थित राधा कृष्ण मंदिर का वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक है। यह मुख्य मार्ग से सिर्फ 100 मीटर बाई ओर है। एक विशाल मंदिर निर्माणाधीन है तथा मंदिर के ठीक सामने लगभग सौ बाइ डेढ सौ का विशाल सेड है जिसमें मंच भी बना है जिसमें समय-समय पर आध्यात्मिक कार्यक्रम प्रवचन इत्यादि होते रहते हैं। राधा कृष्ण धामआश्रम के एक ओर महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग नहाने धोने एवं शौचालय की व्यवस्था है।

आश्रम में प्रवेश करते ही हमें परिक्रमावासी जानकर वहां का एक गृहस्थ कार्यकर्ता बाहर निकले और नर्मदे हर कहकर हमारा आत्मिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मैं पास के गांव का रहने वाला हूं इस मंदिर से जुड़ा हुआ हूं।मंदिर के मुख्य महात्मा कुंभ दर्शन के लिए हरिद्वार गए हैं इसलिए उन्होंने मुझे आश्रम कि जो जिम्मेदारी सौंप रखी है। मैं सपत्नीक यहां महात्मा के अनुपस्थिति में आश्रम की सेवा में हूं। इतना परिचय देने के बाद वे तुरंत हमारी व्यवस्था में जुट गए। एक कार्यकर्ता ने शेड के नीचे दरी बिछाकर गद्दे बिछा दिए। हम वही अपना सामान रख विश्राम मुद्रा में आ गए।

कुछ देर बाद स्नान आदि से निवृत होकर हमने मां नर्मदा की संध्या आरती पूजन किया। इस बीच पास के ही गांव के एक अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी मंदिर पहुंचे और हमारे बीच बैठकर बातचीत करते रहे। हमारी ओर से बातचीत की कमान हमारे साथी परिक्रमा वासी राम निवास तिवारी एवं कामता संभाले हुए थे। बातचीत का विषय वहां उस क्षेत्र में गन्ने की खेती तथा शुगर मिल पर था। चर्चा चल ही रही थी तब तक रात के 9:00 बज चुके थे। भोजन की घंटी लगने पर हमें वहां भोजन कक्ष में आमंत्रित किया गया। साफ-सुथरी विशाल रसोई में मंदिर के कार्यकर्ताओं सहित लगभग 20 लोगों की पंगत लगी। सेवादार दोनों पति पत्नी हम सभी परिक्रमा वासियों को आदर से भोजन कराया। भोजन उपरांत हम शेड के नीचे विश्राम के लिए चले गए।

अभी नींद लगी भी ना थी कि मंदिर के सभागार से हरे रामा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे रामा की सुंदर आवाज एवं धुन सुनाई देने लगी। हमारे साथी महिला परिक्रमा वासी बिसेन चाची, विद्यावती बहन जी, चतुर्वेदी बहन जी, श्रीमती मधु ठाकुर, कल्पना, निरुपमा एवं मैकला बिस्तर वहां भजन के लिए चली गई। श्रीमती मधु के सुंदर भजनों के बाद आश्रम के सेवादार गृहस्थ दंपत्ति ने एक साथ लगभग 2 घंटे तक हरे रामा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे रामा की धुन के साथ भगवान का कीर्तन करते रहे। दोनों पति पत्नी की आवाज अत्यंत मधुर थी। ईश्वर बहुत कम लोगों को सेवा भावना के साथ आध्यात्मिक भाव देता है। जो ईश्वर के प्रिय होते हैं उन्हें ही यह सुख मिलता है।

उनके मुख से निकल रहे हरे रामा हरे कृष्णा की की आवाज सुनते सुनते कब मेरी आंख लग गई मुझे पता ही नहीं लगा और सुबह नींद खुली तो उन्हीं की आवाज से देखा सभी को आवाज लगा लगा कर जगा रहे हैं चाय बन गई है चाय पी लीजिए। उनकी आवाज सुनकर हम उठ गए हालांकि साथ ही महिला परिक्रमा वासी पहले से ही उठकर पूजा-पाठ में लगी हुई थी। हम भी जल्दी जल्दी दैनिक क्रिया स्नान आदिसे निवृत्त होकर मां नर्मदा की पूजन आरती की। इस बीच में दो तीन बार हम सभी के बीच चाय लेकर आ चुके थे।

24 मार्च 2021 दिन बुधवार को सुबह लगभग 9:00 बजे हम पानसेमल के उस सुंदर राधा कृष्ण मंदिर आश्रम से उन सेवाभावी भक्त दंपति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर आगे के लिए रवाना हुए। आज भी नेपथ्य में उन सेवाभावी दंपत्ति की हरे रामा हरे कृष्णा की मधुर आवाज कानों में गूंजती है और बरबस ही उनका चेहरा याद आता है। मां नर्मदा उन्हें खुशहाल रखे। हर हर नर्मदे।

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