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क्षेत्रीय भाषा के सम्मान से मातृभाषा की व्यापकता: नागेंद्र

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यानुरागी की गोष्ठी और पुस्तक विमोचन

आजमगढ़। भाषा की व्यापकता तभी होगी जब हम क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान करेगे। जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा से कटता वह अपनी विरासत से कट जाता है। हम सबका कर्तव्य है कि हम अपनी मातृभाषा हिंदी को सम्मान देकर अपनी विरासत को बचाये। यह बाते भारतीय शिक्षा परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व आईएएस नागेंद्र प्रसाद सिंह ने कही।

वह आज जनपद की प्रसिद्ध हिंदी सेवी संस्था “साहित्यानुरागी” द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप बोल रहे थे।

यह कार्यक्रम नगर के एक होटल में आयोजित था। इस अवसर पर “हिंदी की सामर्थ्य और चुनौतिया” विषय पर साहित्यिक संगोष्ठी हुई और युवा रचनाकार श्रीमती सरोज यादव की कविताओं के संकलन “ए नाविक जरा ठहरो ना” का विमोचन भी किया गया।

नागेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि कला साहित्य और संस्कृति की रक्षा हम तभी कर सकते है जब हम अपनी मातृभाषा की ताकत सुरक्षित रखेगे। उन्होंने कहा कि जब रचना में वाद आता है तो हम वहां उसके यथार्थ से दूर हो जाते है। उन्होंने कहा कि मातृ शक्ति का सम्मान करने के लिए स्त्री विमर्श की रचनाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

गोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यक्रम में “हिंदी की सामर्थ्य और चुनौतिया” विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी के प्रोफेसर डॉ वशिष्ठ अनूप ने कहा कि भारतीय समाज मे आज मातृ भाषा हिंदी को सर्वमान्य स्थान की जरूरत है। हिंदी की कविता में अगर कुछ कमियां हो तो यह समझ लीजिए रचनाकार समृद्ध है। उन्होंने रचनाकार सरोज यादव की कविताओं की समीक्षा करते हुए हिंदी के आजादी आंदोलन के समय से लेकर आज तक कि सामर्थ्य और महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डायट प्राचार्य अमरनाथ राय ने इस अवसर पर कहा कि समाज की पीड़ा को साहित्य के माध्यम से प्रकट करना एक सशक्त व्यवस्था है। आज जरूरत है कि समाज की तमाम व्यवस्था में आई कमियों को दूर करने के लिए रचनाधर्मिता को बढ़ावा दिया जाय।

इस अवसर पर साहित्यकार द्विजराम यादव और राजाराम सिंह एवम सोनी पांडेय ने हिंदी की महत्ता और रचनात्मकता की चर्चा करते हुए कार्यक्रम के उत्कृष्ट आयोजन के लिए प्रसंशा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्यानुरागी की अध्यक्ष डॉ मनीषा मिश्रा ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी के संवर्धन के लिए हमारी संस्था समर्पित है। नवोदित रचनाकारों से लेकर प्रतिष्ठित रचनाकारों को एक साथ एक मंच लाने का हमारा लक्ष्य है। आने वाले समय मे हिंदी की गरिमा को मजबूती देने के लिए साहित्यानुरागी अनेक कार्यक्रम करेगी। जिसमे देश के अनेक प्रसिद्ध साहित्यकार हिस्सा लेंगे।

इसके पूर्व आगंतुक अतिथियों का स्वागत साहित्यानुरागी की अध्यक्ष डॉ मनीषा मिश्रा और कार्यक्रम सयोंजक सरोज यादव ने बुके देकर स्वागत किया। साहित्यानुरागी संचालन समिति से जुड़े विदुषी अस्थाना रविन्द्र अस्थाना विजेंद्र श्रीवास्तव पूनम तिवारी स्नेहलता राय देवेंद्र तिवारी प्रीति गिरी प्रज्ञा कौशिक प्रशांत मिश्र द्वारा आगत अतिथियों को स्मृति चिन्ह बुके और बैज लगाकर  उनका अभिनंदन किया गया। बलिया से आयी सुनीता पाठक ने सरोज यादव की लिखित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही साहित्यानुरागी की संरक्षक डॉ मालती मिश्रा ने कहा कि संस्था के संचालन समिति द्वारा यह आयोजन जिले के हिंदी प्रेमियों में नई ऊर्जा का संचार करेगा और हिंदी के उपयोगिता को भी विशेष स्थान देने में सफल होगा। उन्होंने कहा कि आज यह सफल आयोजन देख कर यह विश्वास हो गया कि साहित्यानुरागी आने वाले समय मे नया प्रतिमान स्थापित करेगी।

कार्यक्रम का संचालन अंशु अस्थाना ने किया। आभार ज्ञापन रचनाकार सरोज यादव ने करते हुए साहित्यानुरागी द्वारा इस कार्यक्रम में उनकी रचना संकलन के विमोचन के लिए कृतज्ञता ज्ञापित किया।

इस अवसर पर साहित्यानुरागी द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में रचनाकार सरोज यादव द्वारा रचित गीतों के संकलन पुस्तक ए नाविक। थोड़ा ठहरो ना की कई रचनाओं की संगीतमय प्रस्तुति बलिया से आयी लोक गायिका सुनीता पाठक ने किया।

कार्यक्रम में भाल चन्द्र त्रिपाठी, ईश्वर चन्द्र त्रिपाठी, चित्रा पवार, प्रभुनारायण पांडेय प्रेमी, हरिहर पाठक बालेदिन बेसहारा शिखा मौर्य कंचन मौर्य आदि लोग मौजूद थे।

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