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कोयले के कम उत्पादन से बिजली सेक्टर में मंडराने लगा संकट…

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बिजली का संकट गहराने लगा है। जिसका मुख्य कारण कोयले का कम उत्पादन। पंजाब, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडू, बिहार समेत कई राज्यों में बिजली सेक्टर को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडान के बाद परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।

 

 

भारत में ग्रिड प्रबंधकों के लिए अक्टूबर हमेशा से एक कठिन महीना रहा है। इस महीने बिजली की मांग हर साल बढ़ जाती है। लेकिन इस अक्टूबर ये मामला कुछ अलग ही है। इसके कई कारण हैं। लॉकडाउन के बाद एक बार फिर से कंपनियां खुल गई हैं, उद्योग धंधे फिर से वापस पटरी पर लौट रहे हैं। जिसके कारण बिजली की मांग बढ़ गई है।

 

 

दूसरा ओर अप्रैल-जून, 2021 में कोयला का कम उत्पादन हुआ। कोरोना की दूसरी लहर में खनन कार्य भी प्रभावित हुआ था। इसके अलावा हर साल मानसून के महीनों में आम तौर पर खनन उत्पादन में कमी होती है। इस साल तेज बारिश और ज्यादा समय तक बारिश होने से खदानों में पानी भर गया, जहां से कोयला निकलना मुश्किल हो गया।

 

 

इसके साथ यह भी जानकारी मिली है कि भारतीय ताप विद्युत संयंत्रों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के कारण कोयले के आयात में तेजी से कमी कर दी। हालांकि इनमें से कुछ कारण असामान्य हैं। इस संकट में एक बात स्पष्ट रूप से सामने आ रही है कि इसमें ग्रिड प्रबंधक और पॉलीसी मैनेजर, सप्लाई चेन, थर्मल पावर प्लांट प्रबंधक और कोल इंडिया लिमिटेड- कोयले की मांग में वृद्धि, और स्टॉक का अनुमान लगाने में विफल रही।

 

 

रिपोर्ट के अनुसार इस साल के अगस्त-सितंबर के महीने में कुल कोयले की खपत में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शुक्रवार आठ अक्टूबर को बिजली की खपत 390 करोड़ यूनिट थी, जो इस महीने में अब तक सबसे ज्यादा थी। कोयले की आपूर्ति में सही से नहीं होने के कारण देश के 135 प्रमुख कोयला बिजली संयंत्रों में से आधे से अधिक में अब तीन दिन से कम का स्टॉक बचा हुआ है।

 

 

हालांकि सीआईएल ने कोयले की आपूर्ति को बढ़ा दिया है। महीने की शुरुआत में जहां 1.4 मिलियन टन प्रतिदिन आपूर्ति हो रही थी तो वहीं 7 अक्टूबर को यह 1.5 मिलियन टन प्रतिदिन पहुंच गया। वहीं अक्टूबर के मध्य तक 1.7 मिलियन टन आपूर्ति करने का लक्ष्य है। इससे उम्मीद है कि कुछ दिनों में संयंत्रों में कोयले का स्टॉक का संकट खत्म हो जाएगा।

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