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कोरोना संक्रमण और समाज का खौफ ऐसा कि कैदी परोल पर भी नहीं जाना चाहते अपने घर …

मैसूर। कोरोना की दूसरी लहर में जहां जेल के 83 कैदियों को परोल की यह सुविधा दी गई है तो वहीं पहली लहर में 63 कैदी पैरोल पर रिहा हुए थे। जेल अधिकारियों के मुताबिक, 45 साल से ऊपर की उम्र वाले करीब 700 कैदियों को कोरोना रोधी टीका लगा है। वहीं, 18 से 44 की आयु वाले कुछ कैदियों ने भी टीका लिया है।

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए देश में कई जेलें कैदियों को परोल पर बाहर निकलने की इजाजत दे रही हैं, ताकि जेलों में भीड़ को कम किया जा सके। हालांकि, मैसूर की एक जेल में आठ कैदियों ने परोल लेने से मना कर दिया और कहा है कि वे जेल में ही रहना पसंद करेंगे। जेल अधिकारियों के मुताबिक, कैदियों के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह बाहर निकलकर संक्रमण का और अधिक खतरा होना है।

जेल अधिकारियों के मुताबिक, कैदी इसलिए भी घर नहीं जाना चाहते क्योंकि उन्हें समाज का डर है। दरअसल, इन कैदियों को लगता है कि जेल में रहने की वजह से अब उन्हें समाज स्वीकार नहीं कर पाएगा।

जेल सुप्रीनटेंडेंट केसी दिव्यश्री ने बताया, ‘हमारी जेल में कुल 83 ऐसे कैदी थे जिन्हें 90 दिनों की परोल मिल सकती थी लेकिन इनमें से आठ ने कहा कि वे घर नहीं जाना चाहते। बाकी कैदियों ने पैरोल ले ली।’

उन्होंने आगे कहा, ‘पैरोल न लेने के कई कारण हैं। पहला तो मौजूदा कोरोना संकट। इसके अलावा परिवार और समाज के बीच एक कैदी को कोई स्वीकार नहीं करता।’

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