मध्य प्रदेश

पीएफआई पर 5 साल का प्रतिबंध, NIA के छापों में टेरर लिंक के सबूत, एमपी में 7 साल में हुए 229 साम्प्रदायिक दंगे की जा रही नए सिरे से जांच शुरू …

भोपाल। केंद्रीय जांच एजेंसी NIA द्वारा देशभर में AFI के ठिकानों पर मारे गए छापों और इससे जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बाद आतंकी टेरर, विदेशी फंडिंग एवं अन्य देश विरोधी गतिविधियों के सबूत मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने बड़ा एक्शन लेते हुए पीएफए और उससे जुड़े सभी संगठनों पर पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसी कार्रवाई में एमपी में गिरफ्तार किए गए पीएफआई कार्यकर्ताओं से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेश में पिछले 7 साल हुए 229 दंगों में भी पीएफआई का हाथ होने के सबूत मिले हैं। इन दंगों की अब नए सिरे से बारीकी से जांच की जा रही है।

22 सितंबर और 27 सितंबर को एनआईए और ईडी ने देशभर में और राज्यों की पुलिस के साथ पीएफआई पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। 22 सितंबर को मारे गए छापों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ और जांच में मिले सबूतों के आधार पर 27 सितंबर को फिर देश भर में छापे मारकर कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एमपी एटीएस ने 22 सितंबर को पहली कार्रवाई में इंदौर, उज्जैन से पीएफआई के 4 नेताओं को गिरफ्तार किया था। ये 30 सितंबर तक रिमांड पर हैं। इनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में बड़े चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। दूसरे दौर की कार्रवाई में एमपी से एनआईए और एटीएस ने 21 और संदिग्धों को पकड़ा है। इन छापों के दौरान सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों के नाम पर बने पीएफआई के बारे में आतंकी और देश-विरोधी गतिविधियां चलाने के पुख्ता सबूत मिले हैं।

एमपी में उज्जैन को इस संगठन का गढ़ माना जाता है। एनआईए के इनपुट पर एमपी एटीएस ने छापेमारी कर इंदौर से पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल करीम, जनरल सेक्रेटरी अब्दुल खालिद, कोषाध्यक्ष मोहम्मद जावेद ओजी और उज्जैन से प्रदेश सचिव जमील शेख को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई और पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर देश के अलग-अलग राज्यों के साथ मध्य प्रदेश में दूसरे राउंड में 27 सितंबर को एटीएस और मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के 8 जिलों में संयुक्त छापामार कारर्वाई की गई। इसमें इंदौर, भोपाल, उज्जैन, नीमच, शाजापुर, शयोपुर और गुना स्थित पीएफआई के ठिकानों से 21 सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, पुलिस टीम अन्य संदिग्धों की भी तलाश में जुटी हुई है।

दूसरे राउंड में 27 सितंबर को एटीएस और मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जिन आरोपियों को हिरासत में लिया गया, उनमें अब्दुल रऊफ बेलिम निवासी इंदौर, अब्दुल सईद निवासी इंदौर, तौसीफ छीपा निवासी इंदौर, यूसुफ मोलानी निवासी इंदौर, दानिश गौरी निवासी इंदौर, मोहम्मद आजम नागौरी निवासी उज्जैन, आकिब खान निवासी उज्जैन, ईशाक खान निवासी उज्जैन, जुबेर अहमद निवासी उज्जैन, शाकिर निवासी शाजापुर, समीउल्ला खान निवासी शाजापुर, शहजाद बेग निवासी राजगढ़, रईस कुरैशी निवासी सीका राजगढ़, शाहरूख ऊर्फ अब्दुर रहमान निवासी राजगढ़, मोहसिन कुरैशी निवासी गुना, मोहम्मद शमसाद निवासी श्योपुर, आजम इकबाल निवासी श्योपुर, इमरान तंवर निवासी नीमच, ख्वाजा हुसैन मंसूरी निवासी नीमच, साहिल खान निवासी नीमच, आशिक रंगरेज निवासी नीमच बताए गए हैं।

मध्य प्रदेश में बीते 7 साल में 229 दंगे हुए। इसके अलावा हाल ही में खरगोन दंगे में भी पीएफआई का नाम सामने आया था। लेकिन अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण इनपुट मिले हैं। सूत्रों ने बताया सिर्फ खरगोन ही नहीं, बल्कि पिछले 7 साल में प्रदेश में जितने भी दंगे हुए हैं, उनमें पीएफआई की भूमिका को लेकर नए सिरे से जांच शुरू कर दी गई है।

एटीएस पीएफआई के कनेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है। साल 2015 में दंगे के 62 मामले दर्ज किए गए। इनमें 179 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 135 आरोपियों को सजा भी मिली। 2016 में 59 मामले दर्ज हुए। इनमें 177 आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि 109 आरोपियों को सजा मिली। साल 2017 में 39 मामले दर्ज हुए। इनमें 125 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। जबकि 75 को सजा हुई।

2018 में 24 दंगों में 79 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इनमें से 31 को सजा सुनाई गयी। 2019 में 15 मामलों में 52 लोग गिरफ्तार किए गए इनमें से 21 आरोपियों को सजा हुई। साल 2020 में 20 मामले दर्ज हुए। इनमें 70 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इनमें से 34 को सजा सुनाई गयी। साल 2021 में 9 मामले दर्ज हुए। इनमें 26 आरोपी गिरफ्तार किए गए, जबकि18 आरोपियों को सजा हुई। इस साल 2022 में फरवरी तक एक मामला दर्ज हुआ। इनमें दो आरोपी गिरफ्तार हुए और दोनों को सजा हुई।

पीएफआई के अलावा इससे जुड़े 9 संगठन रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (एनसीएचआरओ), नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन जैसे सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगाया गया है।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। ये संगठन दक्षिण भारत में तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। पीएफआई का दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों में यह संगठन सक्रिय है।

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