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सांसद अरुण साव ने बताया- मुंगेली में जल्द खुलेगा नया केन्द्रीय विद्यालय …

बिलासपुर। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन बिलासपुर सांसद अरुण साव ने लोकसभा में छत्तीसगढ़ में नवीन केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना एवं घोंघा जलाशय से लगी करीब 20 एकड़ भूमि को ‘बर्ड सेंचुरी’ के रूप में विकसित किए जाने का मुद्दा उठाया।

कोरोना संक्रमण की इन विषम परिस्थितियों में संसद का मानसून सत्र सोमवार को शुरू हुआ। वर्तमान् में समयाभाव के कारण सांसदों को तारांकित प्रश्न पूछने की अनुमति नहीं है। श्री साव ने तारांकित प्रश्न क्रमांक-161 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के संबंध में प्रश्न किया था, जिसके लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने बताया कि केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना एक सतत प्रक्रिया है।

राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों को केंद्रीय विद्यालय संगठन के मापदंड के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। छत्तीसगढ़ के 8 जिलों बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, गरियाबंद, मुंगेली, सूरजपुर, एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय नहीं है। मुंगेली में नया केंद्रीय विद्यालय प्रारंभ किया जा रहा है। इसके लिए लखनपुर में 12 एकड़ भूमि को चिन्हित किया गया है।

वर्तमान में शासकीय उच्चतर विद्यालय भटगांव में 10 कमरों वाली एक इमारत की पहचान की गई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में नया केन्द्रीय विद्यालय खोलने के लिए राज्य सरकार से अभी प्रस्ताव नहीं मिला है। सांसद साव ने नियम 377 के अंतर्गत ग्राम शिवतराई (कोटा) में घोंघा जलाशय (कोरी बांध) के निकट क्षेत्र को ‘बर्ड सेंचुरी’ के रूप में  विकसित करने उचित पहल एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार से आग्रह किया।

सांसद ने सदन को अवगत कराया कि विकासखंड- कोटा,  के ग्राम-परसदा, शिवतराई के समीप घोंघा जलाशय (कोरी बांध) स्थित है। अचानकमार टाईगर रिजर्व से जुड़े इस इलाके में सैकड़ों की संख्या में दुर्लभ प्रजाति के विदेशी पक्षी दिखाई देते हैं। घोंघा जलाशय के आसपास घने जंगल हैं। यह क्षेत्र गोल्डन बर्ड, डाटेड डब, ब्लैक स्टार, हुदहुद, ब्लैक व्हाईट , किंगफिशर, ब्लैड डग, ग्रे हार्नविल, जंगली मुर्गा-मुर्गी, उड़न गिलहरी, मयूर, जंगली मैना आदि दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों की आरामगाह के रूप में प्रसिद्ध है।

इसमें से कई पक्षी तो विलुप्ति के कगार पर हैं, किन्तु इन दुर्लभ प्रजातियों के परिंदों के संरक्षण के लिए अब तक कोई पहल नहीं की जा सकी है। घोंघा जलाशय (कोरी बांध) से लगी लगभग 20 एकड़ भूमि पर परिंदों की आरामगाह के रूप में “बर्ड सेंचुरी” का निर्माण कराए जाने की आवश्यकता है ।

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