
मंत्रीपरमार ने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का किया विमोचन
भोपाल
भारतीय ज्ञान परम्परा में ज्ञान और विज्ञान का समृद्ध भंडार निहित है। इस ज्ञान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। परम्परा, ज्ञान और तकनीक का समन्वय नवाचार के साथ-साथ युवाओं को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कही।
मंत्रीपरमार ने बुधवार को भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, जबलपुर द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का विमोचन किया।
भारतीय ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की अभिनव पहल
मंत्रीपरमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान नहीं है, बल्कि इसमें जीवन को सार्थक एवं संतुलित बनाने वाले ज्ञान और अनुभव का व्यापक भंडार है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से इस ज्ञान को सरल, सहज और युवाओं के अनुकूल स्वरूप में प्रस्तुत करना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, ज्ञान परंपरा और मूल्यों से जोड़ते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना भी है। जब तकनीक का उपयोग भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए किया जाता है, तो नवाचार का स्वरूप और अधिक सार्थक हो जाता है।
‘सनातन कैलेंडर एआई’ में पंचांग एवं धार्मिक ज्ञान की डिजिटल सुविधा
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ के माध्यम से पंचांग, व्रत-पर्व, पूजा-विधि एवं धार्मिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। इसके माध्यम से भारतीय परंपराओं और धार्मिक ज्ञान से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से सहज एवं सुगम रूप में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
‘अंतर्-गीता’ से नई पीढ़ी तक पहुंचेगा गीता का जीवनोपयोगी ज्ञान
‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप के माध्यम से मद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी ज्ञान को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। आधुनिक डिजिटल माध्यम के जरिए गीता के जीवन-दर्शन एवं संदेश को युवाओं के लिए अधिक सहज और संवादात्मक बनाने की दिशा में यह अभिनव पहल है।
मंत्रीपरमार ने इस नवाचारी प्रयास के लिए जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षा, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को नई दिशा देने के साथ विद्यार्थियों में नवाचार एवं अनुसंधान की भावना को भी प्रोत्साहित करेंगे।
परमार ने कहा कि प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली ऐसी पहलें इसी उद्देश्य को सार्थक करती हैं।
इस अवसर पर जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक, अनुसंधान एवं विकास अधिष्ठाता डॉ. कमल कुमार कुशवाहा, कंप्यूटर विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. सौरभ सिंह, छात्र अभय बैरागी एवं छात्रा अविशा गुप्ता सहित टीम के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

















