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निराशाओं से घबराना नहीं, मजबूत बनना सीखें – स्वामी सत्यानन्द सरस्वती

नव वर्ष संदेश …

‘नये वसन्त के नये पात, नये फूल, नयी डाल’-पिछले साल के जीर्ण-शीर्ण पत्तों को झकझोर कर गिरा दो। नया साल नया फूल देगा। निराशाओं से घबराना नहीं, मजबूत बनना सीखो। भूतकाल की निराशाओं के पन्नों को फाड़कर अज्ञान की खाई में फेंक दो। दुनिया का जीवन आशाओं-निराशाओं का पिंजरा है, और आध्यात्मिक जीवन एक आनंदमय खेल का मैदान है। हमें चोट लगती है, जीत होती है, हार होती है, तो भी हम हॅंसते हैं, खिलखिलाते हैं।

चिन्ता किसे नहीं, दुःख किसे नहीं? नदी बहती है, बहना उसका स्वभाव है। जीवन चलता है, चलना उसका स्वभाव है। अब संकल्पों में कमजोरी न लाना श्रद्धा को मजबूत बनाना। संशय की रात जा रही है, विश्वास का सूरज तेजी से चमके ताकि तुम लोगों को राह मिल सके। नया वर्ष परिवर्तन ला रहा है। प्रेरणा की धारा को अब पहले से अधिक चौड़ा मार्ग मिलना चाहिए। सद्संकल्पों को मूर्त रूप दो।

         सारी जिंदगी योग साधना है, ईश्वर का दूसरा नाम आनन्द है। हिम्मत के साथ मंजिल तक बढ़ते जाओ, उज्जवल भविष्य तुम्हारे पथ में फूल बिखेर रहा है। तुम्हारा ईश्वरनिष्ठ सजग जीवन तुम्हारे परिवार और तुम पर मंगल की वर्षा करे।

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