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ललित जी ने मूल्यों के साथ नहीं किया कभी समझौता : नथमल शर्मा

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब ने आज देश के ख्यातिप्राप्त पत्रकार व देशबंधु समूह के प्रधान संपादक ललित सुरजन के निधन पर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर नथमल शर्मा ने कहा कि ललित जी ने पत्रकारिता के मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। वे सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के प्रतिष्ठित पत्रकार थे। वे चाहते तो एक बड़े कार्पोरेट बन सकते थे मगर उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय मायाराम सुरजन के विरासत को ही आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

बिलासपुर प्रेस क्लब की ओर से प्रेस क्लब में आज ललित सुरजन को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर देशबंधु में लंबे समय तक संपादक रहे इवनिंग टाइम्स के प्रधान संपादक नथमल शर्मा ने कहा कि ललित जी ने देशबंधु के विरासत को आगे बढ़ाया। मेरा सौभाग्य है कि मैं मायाराम सुरजन जी और ललित सुरजन दोनों के साथ काम किया हूं। उन्होंने पत्रकारिता के मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। इस राह पर चलना आज के दौर में आसान नहीं है। हम उस स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं इसलिए कोशिश करते हैं कि ललित जी के बताए मार्ग पर चल सकें।

देशबंधु में काम कर चुके पत्रकार आज भी खुद को देशबंधु से अलग नहीं समझ पाते, मैं जो कुछ भी आज हूं देशबंधु के बदौलत हूं। बहुत सारे लोग जो काम किए, कहीं और चले गए और बहुत सारे लोग आज कहीं और हैं। वैचारिक मूल्यों के साथ बाबूजी ने या ललित जी ने कोई समझौता किया। स्पष्ट नीति रही कि साम्प्रदायिक ताकतों के साथ हमें समझौता नहीं करना है। ललित सुरजन चाहते तो बड़ा कार्पोरेट बन सकते थे मगर उन्होंने पत्रकारिता को चुना और उसमें भी मूल्यों पर आधारित।

आज कार्पोरेट जर्नलिज्म का समय है। सबसे बड़ी संस्था अखबार नहीं प्रेंस क्लब है। प्रेस क्लब की भूमिका को पत्रकारिता के मूल्यों से जोड़ सके तो शायद हम एक कदम बढ़ सकेंगे। प्रेस क्लब को राजनीति के आगे नहीं पीछे लाकर खड़ा कर दिया है। आज आत्मचिंतन करने की जरूरत है जब हमारा एक साथी जो पत्रकारिता को मूल्यों के रूप में स्थापित करके चला गया। प्रेस क्लब के माध्यम से हम बिलासपुर के लिए कोई भूमिका निभा सकते हैं क्या। दुर्भाग्य है कि हम इस लाइन पर चल नहीं पा रहे हैं।

एक समय था जब बिलासपुर प्रेस क्लब की एक बैठक से अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह के कान खड़े हो जाया करता था। शासन प्रशासन से पूछताछ होने लगती थी कि आखिर प्रेस क्लब के लोग क्यों सक्रिय हो रहे हैं। आज ललित सुरजन को श्रद्धांजलि देने के बहाने सभी पत्रकारों को इस बात को सोचना चाहिए कि आज यह परिस्थिति क्यों निर्मित हुई है। ज्यादातर यहां उनके साथ काम करने वाले लोग हैं और या फिर उनके जान पहचान के।

बिलासपुर प्रेस क्लब को खड़ा करने में स्वर्गीय डीपी चौबे ने बड़ी लड़ाई लड़ी, कई इस बात के गवाह हैं। आज देश के ओम थानवी, रविश कुमार जैसे कई बड़े-बड़े पत्रकार ललित जी के बारे में लिख रहे हैं, तब यह तो मानना पड़ेगा कि उनमें कुछ न कुछ तो खूबियां रही होगी। हम इस स्तर के लोग नहीं है मगर बिलासपुर के बारे में तो सोच सकते हैं। पत्रकारों के कल्याण के लिए सोच सकते हैं। जिस दिन हम यहां प्रेस क्लब के चुनाव पर होते हैं तब 3 से 4 सौ की भीड़ होती है।

आज देश के एक बड़े पत्रकार को श्रद्धांजलि देने प्रेस क्लब में 15 लोग आते हैं। इस प्रेस क्लब की ताकत को पहचानना होगा। हम लोग देशबंधु में काम किए हैं इलिए आए हैं, मगर ललित सुरजन सिर्फ देशबंधु के नहीं थे। आज खुदको टटोलने का समय है कि हम पत्रकारिता में हैं तो क्यों। काम करने के लिए बहुत जगह है। कोयला से लेकर गाड़ी और लायसेंस लेकर काम कर सकते हैं। प्रेस क्लब को एक परिवार बनाने की जरुरत हैँ।

बिलासपुर के सभी पत्रकार सुरजन परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। वरिष्ठ पत्रकार सतीश जायसवाल ने कहा कि मैं और ललित सुरजन साथ के थे। बल्कि मैं दो साल उम्र में उनसे बड़ा हूं। मैंने एक अच्छा मित्र व पत्रकार और मार्गदर्शक खोया है।

छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में ललित सुरजन एक आधार स्तंभ थे। उन्होंने कोई समझौता नहीं किया। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को बौद्धिक औँर वैचारिक स्तर पर उंचा उठाने का काम भी किया।

देशबंधु पत्रकारिता के स्कूल से लेकर एक विश्विद्यालय तक अपनी उपलब्धि हासिल की। ललित सुरजन चाहते थे कि बिलासपुर में एक उनका एकल काव्य पाठ हो जो नहीं हो पाया। इस बात का उन्हें दु:ख है। बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित शोक सभा कार्यक्रम में प्रेस क्लब के अध्यक्ष तिलक राज सलूजा, राष्ट्रीय पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद शर्मा जी, वरिष्ठ पत्रकार विजयकांति ओझा, निर्मला माणिक, अतुलकांत खरे, एम मलिक, भागवत वर्मा, विकास चौबे, दीपक राई, राकेश खरे, टीआर लहरे, विदेश केसरी, राकेश मिश्रा, कांति नामदेव, सुरेश खरे सहित पत्रकार व मीडिया कर्मी उपस्थित थे।

 

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