
एचईसी बोर्ड करेगा फैसला, बंद ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ी
रांची
झारखंड के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहे एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को फिर से शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।
नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से डिफिलिएट हो चुके एचटीआई की संबद्धता बहाल कराने का प्रस्ताव अब एचईसी के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक में रखा जाएगा।
बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद प्रबंधन एनसीवीटी को पत्र लिखकर संस्थान की संबद्धता दोबारा बहाल करने का अनुरोध करेगा। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो लंबे समय से बंद पड़े इस संस्थान में एक बार फिर तकनीकी प्रशिक्षण शुरू होने की उम्मीद जगेगी, जिससे राज्य के सैकड़ों युवाओं को बड़ा लाभ मिल सकता है।
एचईसी के सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन बोर्ड के समक्ष यह भी रखेगा कि एचटीआई केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि कंपनी के लिए भविष्य में कुशल मानव संसाधन तैयार करने और आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकता है।
संस्थान को दोबारा संचालित करने के लिए बाहरी एजेंसी की सेवाएं लेने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल इस पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि अंतिम निर्णय बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में होगा।
एचईसी के अधिकारियों का कहना है कि कंपनी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में संस्थान का संचालन प्रभावित हुआ।
लेकिन यदि बोर्ड आफ डायरेक्टर्स से मंजूरी मिलती है, तो एनसीवीटी से संबद्धता बहाल कराने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद संस्थान को नए स्वरूप में शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ऐसे में अब झारखंड के युवाओं की नजर एचईसी बोर्ड की बैठक पर टिकी है, जहां लिया गया फैसला राज्य में तकनीकी प्रशिक्षण के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
आर्थिक संकट की वजह से बंद हो गया संस्थान
दरअसल, एचईसी के आर्थिक संकट का सबसे बड़ा असर उसके प्रशिक्षण संस्थान पर पड़ा। लगातार वित्तीय समस्याओं के कारण एचटीआई का संचालन प्रभावित होता गया और वर्ष 2022-23 से यहां नया नामांकन पूरी तरह बंद हो गया।
इसके बाद एनसीवीटी ने पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता समाप्त की। अब इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट कर दिए गए हैं। परिणामस्वरूप संस्थान में संचालित सभी पांच ट्रेड बंद हो गए और एचटीआई पर ताला लटक गया।
एचईसी प्रबंधन यहां आईटीआई के तहत इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट (दो वर्षीय) तथा कोपा और वेल्डर (एक वर्षीय) ट्रेड का संचालन करता था। वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारियों की तैनाती है, जो कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख कर रहे हैं। संस्थान में अब किसी भी ट्रेड में नामांकन नहीं हो रहा है।
एचटीआई में दो शिफ्ट में होती थी पढाई
एक समय एचटीआई झारखंड में औद्योगिक प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता था। यहां दो शिफ्टों में प्रशिक्षण संचालित होता था। प्रत्येक ट्रेड में दोनों शिफ्ट मिलाकर 40 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाता था।
पांचों ट्रेडों में हर वर्ष करीब 200 छात्र नामांकन लेते थे। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को एचईसी के अलावा देश की कई बड़ी औद्योगिक कंपनियों में रोजगार मिलता था।
कई प्रशिक्षु विदेशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे संस्थान का बंद होना केवल एचईसी का नुकसान नहीं, बल्कि राज्य के तकनीकी शिक्षा तंत्र के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड की बैठक में यह भी बताया जाएगा कि एचटीआई को पुनर्जीवित कर एचईसी न केवल युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध करा सकता है, बल्कि भविष्य में विभिन्न उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कुशल तकनीशियन तैयार कर अपनी आय भी बढ़ा सकता है। इसी कारण प्रबंधन संबद्धता बहाली को प्राथमिकता दे रहा है।
संस्थान से चोरी हो रहे हैं उपकरण
इस बीच, बंद पड़े संस्थान की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई है। कर्मचारियों के अनुसार, एचटीआई परिसर से कई महत्वपूर्ण उपकरण चोरी हो चुके हैं। संस्थान के लिए लगाया गया ट्रांसफार्मर तक गायब हो गया है।
मशीनों में लगे मोटर और अन्य उपकरण भी लगातार चोरी हो रहे हैं। अब लेथ मशीनों के पुर्जे तक गायब होने लगे हैं। यदि समय रहते संस्थान को दोबारा चालू करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो परिसर में लगी 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनों के भी चोरी होने का खतरा है।
















