मध्य प्रदेश

उज्जैन रेल बायपास परियोजना पर विवाद, मार्केट रेट और मुआवजे में भारी अंतर से भड़के किसान

उज्जैन 
 उज्जैन में नईखेड़ी से चिंतामणि तक 8.60 किलोमीटर लंबी रेललाइन के लिए चिह्नित जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने मोर्चा खोल दिया है. बिना पूर्व सूचना सर्वे करने पहुंची प्रशासन और रेलवे की टीम को लौटना पड़ा. 5 गांवों के किसानों का कहना है कि उनकी जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों में और मुआवजे की गणना गाइडलाइन से की जा रही है। 

अधिग्रहण में 5 गांवों के 85 किसान प्रभावित
सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम करने के लिए तैयार की जा रही नईखेड़ी-चिंतामण रेल बायपास परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण पर विवाद बढ़ गया है. प्रस्तावित 8.60 किलोमीटर के रेललाइन के एलाइनमेंट को लेकर पांच गांवों के 85 प्रभावित किसान विरोध में उतर आए हैं. शुक्रवार को जमीन और उस पर मौजूद परिसंपत्तियों का आकलन करने पहुंची राजस्व एवं रेलवे अधिकारियों की टीम को किसानों के विरोध के बाद बिना सर्वे के लौटना पड़ा। 

बार-बार एलाइनमेंट बदलने से किसान नाराज
किसानों का कहना है कि परियोजना का रूट 4 से 5 बार बदला जा चुका है. पहले ऐसे विकल्पों पर चर्चा हुई थी, जिनसे कम जमीन प्रभावित होती और निर्माण लागत भी घट सकती थी. इसके बावजूद प्रस्ताव में रेल लाइन किसानों के खेतों से होकर निकाली जा रही है. गांव दाऊद खेड़ी, चिंतामण, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बा क्षेत्र के 85 सर्वे नंबर अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई है. किसानों ने एलाइनमेंट को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। 

अधिग्रहण का मामला कोर्ट भी पहुंचा
किसानों का कहना है कि रेलवे ने कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए 4 सप्ताह का समय मांगा है लेकिन दूसरी ओर जमीन पर सर्वे की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया. प्रस्तावित रेल लाइन के आसपास अब 7 कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं. बड़े होटल भी संचालित किये जा रहे हैं. यहां भूखंडों की कीमत 4000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक है. जमीन का बाजार मूल्य 3 से 4 करोड रुपए प्रति बीघा है, जबकि मौजूदा गाइडलाइन करीब 15 से 26 लाख रुपए प्रति बीघा तक बताई गई है. इसी आधार पर चार गुना मुआवजा जोड़ने पर लगभग 60 लाख रुपए प्रति बीघा की राशि बनती है। 

प्रभावित किसानों की मीटिंग बुलाने की मांग
किसान जीत सिंह फौजी का कहना है "संबंधित अधिकारियों को सभी प्रभावित किसानों की संयुक्त बैठक बुलाकर मुआवजे की गणना जमीन की दर अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया लिखित रूप में बताना चाहिए. अधिकारियों की टीम बिना किसी पूर्व सूचना के खेतों में पहुंच गई. किसानों को ना तो सर्वे के आदेश की जानकारी दी गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है. पहले प्रशासन अधिग्रहण की सीमा और मुआवजे का आधिकारिक प्रस्ताव सामने रखे उसके बाद ही सर्वे में हम सहयोग करेंगे। 

प्रशासन ने किसानों को दीपावली बाद बुलाया
मौके पर पहुंची नायब तहसीलदार दीप्ति मांझी ने बताया "राजस्व टीम खेतों में मौजूद ट्यूबवेल पेड़ और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करने पहुंची थी. किसानों से प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया गया लेकिन उन्होंने जमीन के मुआवजे और दूसरी जानकारियां पहले उपलब्ध करवाने की मांग रखी. अधिकारियों ने किसानों को दीपावली के बाद कार्यालय बुलाकर संबंधित जानकारी देने की बात कही है. गाइडलाइन और मुख्य मार्ग की गाइडलाइन में अंतर होने के कारण भी किसान असंतुष्ट हैं।  

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