कांग्रेस शामिल नहीं होगी महाराष्ट्र सरकार में

 (महाराष्ट्र की राजनीति पर विशेष रपट)

मुंबई { संदीप सोनवलकर } । कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मराठा छत्रप शऱद पवार को साफ कह दिया है कि कांग्रेस किसी भी हालत मे शिवसेना के साथ सरकार में शामिल नहीं होगी। अगर एनसीपी और शिवसेना मिलकर सरकार बनाते हैं तो कांग्रेस बाहर से समर्थन देने या विरोध नहीं करने पर विचार नहीं करेगे।

जानकारी के अनुसार कांग्रेस इस बात के लिए तैयार नहीं है कि बीजेपी को बाहर रखने के लिए किसी भी हद तक जाया जाए। सोनिया गांधी से शरद पवार की करीब 35 मिनट तक चली मुलाकात में सोनिया गांधी ने शरद पवार के सारे सुझावों पर ध्यान दिया। खुद शरद पवार ने ये बात मानी कि जब तक बीजेपी की सरकार गिर नहीं जाती तब तक किसी और वैकल्पिक सरकार के लिए काम नहीं करना चाहिए। पवार ने बैठक में ये भी फार्मूला सामने रखा कि शिवसेना का सीएम हो और एनसीपी का डिप्टी सीएम जबकि विधानसभा अध्यक्ष पद कांग्रेस को दिया जाए लेकिन सोनिया गांधी ने सरकार में किसी तरह से शामिल होने से साफ मना कर दिया। सोनिया ने कहा कि पवार चाहे तो वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन कांग्रेस बाहर से ही साथ देगी।

दरअसल कांग्रेस को लंबी राजनीति की चिंता है वो जानती है कि एक बार शिवसेना के साथ गए तो उत्तर भारतीय और अल्पसंख्यक वोट जो लौटा है वो दूर चला जाएगा साथ ही देश की राजनीति में कांग्रेस पर कम्यूनल कहलाने वाली शिवसेना से हाथ मिलाने का आरोप लगेगा। जिससे केन्द्र में सेक्लूयर गठजोड़ का उसका सपना अधूरा रह जाएगा।

महाराष्ट्र के दो पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण ने भी सोनिया गांधी को यही बताया है कि अगर बीजेपी को हटा कर शिवसेना एनसीपी को सरकार बनाने दी गई तो नुकसान कांग्रेस का ही होगा। दोनों क्षेत्रीय दल एनसीपी और शिवसेना राज्य में जम जाएंगे और उत्तरप्रदेश के सपा-बसपा के साथ देने की तरह का नुकसान होगा। कांग्रेस कभी अपने पैरों पर खडी नहीं पाएगी।

महाराष्ट्र के प्रभारी बने एक वरिष्ठ नेता की राय है कि शरद पवार के बाद एनसीपी का एकजुट रह पाना मुश्किल है इसलिए कांग्रेस को इंतजार करना चाहिए। कांग्रेस को अपनी जगह बनानी है तो उसे भाजपा से लड़ने वाली पार्टी ही कहलाना चाहिए। कांग्रेस का ये भी मानना है कि ये समय सेक्यूलर राजनीति का है उसमें पवार पर भरोसा करके की गई गलती भारी पड़ सकती है। वैसे भी कांग्रेस को पवार पर पूरा भरोसा नहीं है। पिछली बार तो पवार ने बिना मांगे ही भाजपा को यहां की सरकार को समर्थन देकर मदद कर दी थी। इस बार भी वो कुछ भी कर सकते हैं।

शरद पवार से राहुल कैंप भी खुश नहीं हैं। शरद पवार ने ही राहुल गांधी की लीडरशिप पर सबसे पहले सवाल उठाए थे। पवार ने सोनिया का भी विरोध किया था। यहां तक विपक्ष में बैठने पर भी महाराष्ट्र में नेता विपक्ष का पद एनसीपी को ही मिलेगा। तो कांग्रेसियों को लगता है कि वो हर नुकसान सहकर एनसीपी का फायदा क्यों कराएं। महाराष्ट्र में इस बार 288 में से बीजेपी की 105 सीट आई है लेकिन वो सामान्य बहुमत के आंकड़े 145 से बहुत दूर है। उसे अगर 15 निर्दलीय का समर्थन भी मिलता है तो भी उसे किसी और की जरुरत होगी। उधर शिवसेना के 56 विधायक आए हैं लेकिन वो बीजेपी से मुख्यमंत्री पद मांग रहे हैं। एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 अगर शिवसेना के साथ मिल जाए तो उनकी सरकार बन सकती है।