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बरमान घाट जहां मां नर्मदा का है विराट स्वरूप यहां के टापू को कहा जाता है ब्रम्हाजी की तपोभूमि …

 

नर्मदा परिक्रमा भाग-27

 

अक्षय नामदेव। शाम के 4:00 बजने वाले थे और हम बरमान घाट नर्मदा उत्तर तट पर पहुंच रहे थे। जब हम दक्षिण तट की यात्रा पर थे तब भी हम बरमान घाट पहुंचे थे परंतु बरमान घाट के दर्शन से हमारा नहीं भरा था और उसी की प्रतिपूर्ति स्वरूप हम आज बरमान घाट उत्तर तट पर थे।

नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों में बरमान घाट एक प्रमुख घाट है जिसकी धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ता के साथ सांस्कृतिक महत्व भी है। बरमान घाट में मां नर्मदा विराट एवं गंभीर स्वरूप में है। बरमान घाट से थोड़ी दूर नर्मदा की धाराएं बंट जाती है और फिर आगे में आपस में मिल जाती है तो मध्य में एक टापू बन जाता है। इसी टापू को ब्रह्मा की तपोभूमि कहा जाता है स्कंद पुराण के अनुसार यह स्थान पौराणिक काल में अत्यंत सुंदर एवं प्राकृतिक सौंदर्य से पूर्ण था जिसके कारण ब्रह्मा को नदी के बीच बने टापू ने तपोभूमि बनाने के लिए आकर्षित किया। ब्रह्मा ने यहां तपस्या के साथ यज्ञ भी किया इसीलिए इसका नाम बरमान घाट पड़ा है। यहां नर्मदा में स्नान कर ब्रह्म कुंड का दर्शन करने से वांछित फल की प्राप्ति होती है। बरमान घाट का संबंध पांडव काल से भी है तथा यहां से जुड़ी पांडव कालीन अनेक कहानियां प्रचलित हैं। बरमान घाट तट पर अनेक मंदिरों के समूह जहां दर्शन कर पूजन करने से आत्मिक शांति मिलती है। हमारे धनपुर के ब्रह्मलीन संत बाबा मनु गिरी महाराज बताते थे कि वह अपनी युवावस्था में तीर्थाटन एवं भ्रमण के दौरान बरमान घाट में 4 महीने रुक कर चतुर्मास बिताया था।

बरमान घाट नरसिंहपुर जिले का नर्मदा तटीय प्रमुख घाट है। नर्मदा परिक्रमा में होने के कारण हम भले ही नरसिंहपुर जिले के सभी घाटों एवं तीर्थ स्थानों का दर्शन नहीं कर पाए परंतु वास्तविक रूप से देखा जाए जाए तो नरसिंहपुर चार-पांच दिन रह कर यहां के सभी घाटों जैसे बल खेड़ी घाट, झालौन घाट, शगुन घाट, कोठिया घाट, ,टिम रावन घाट ,कंचकच घाट ,बुध घाट, सरराघाट,ककरा घाट रिछावरघाट, सुनाचर घाट,, पिपरिया घाट, आंडियां घाट, भटेरा घाट, शुक्ल घाट, कोउधानघाट इत्यादि है जहां आप दर्शन पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।

बरमान घाट का उत्तर तक अत्यंत सुंदर है। घाट उतरने के पहले प्रवेश द्वार पर ही तीर्थ यात्रियों एवं परिक्रमा वासियों के विश्राम के लिए शेड युक्त प्रतीक्षालय है जहां आप बैठकर नर्मदा के विहंगम स्वरूप का दर्शन कर सकते हैं। घाट उतारने के लिए यहां सुंदर प्रवेश द्वार बना हुआ है तथा नीचे नर्मदा तक सीढ़ियां बनी हुई है। इन सीढ़ियों पर ही अनेक तरह की दुकाने जैसे धार्मिक किताब पूजा सामग्री एवं पूजा स्थल बने हुए हैं।

नर्मदा घाट पहुंचकर सबसे पहले मैंने मां नर्मदा को प्रणाम किया तथा ब्रह्मा का ध्यान कर उन्हें भी प्रणाम कर स्नान के लिए नर्मदा में उतरा। मुझे स्नान करते देख मैंकला भी स्नान करने लगी ।यहां नर्मदा का जल अत्यंत शीतल निर्मल है। बोरास में धूप में परेशान होने के कारण जो थकान थी यहां नर्मदा स्नान से दूर हो गई।

नर्मदा स्नान के बाद हमने मां नर्मदा की तट पूजा की। बरमान घाट से ही नर्मदा से संबंधित कुछ धार्मिक किताबें खरीदी तथा तट पर कुछ देर विश्राम किया और आगे की परिक्रमा के लिए रवाना हो गए।

 

 

 हर हर नर्मदे

 

 क्रमशः

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