
बिहार राजनीति में बड़ा उलटफेर, RJD छोड़ BJP में शामिल हुईं रितु जायसवाल
पटना
आरजेडी की पूर्व महिला नेता रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई हैं. बीजेपी प्रदेश संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस मौके पर मंत्री दिलीप जायसवाल भी मौजूद रहे. बता दें कि जायसवाल ने BJP का दामन थामने की औपचारिक घोषणा 24 मई को की थी. आरजेडी छोड़कर रितु जयसवाल के साथ कई अन्य नेता भी बीजेपी में शामिल हुए। इनमें प्रोफेसर राजमणि, सीमा जायसवाल, माया गुप्ता, शकुंतला प्रजापति, संगीता यादव, सुलेखा खातून, पानो देवी, अनिल महतो और शिवशंकर शामिल हैं।
बीजेपी में शामिल होने के बाद ऋतु जयसवाल ने कहा कि आज वह पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ पार्टी में शामिल हो रही हैं. उन्होंने कहा कि उनके पुराने वीडियो सामने लाकर उन्हें ट्रोल किया जा सकता है, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं.उन्होंने कहा कि जब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब उन्हें बागी कहा गया था। इसके बावजूद उन्होंने करीब 65 हजार वोट हासिल किए थे।
रितु जायसवाल ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रहित की राजनीति करती है और देश से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे राष्ट्रहित और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की बात करते हैं।
RJD से क्यों बढ़ी दूरियां?
मुखिया दीदी’ के नाम से पहचान बनाने वाली रितु जायसवाल पहले आरजेडी की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं. उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से चुनाव लड़ा था और बहुत कम अंतर से हार गई थीं. लेकिन बाद में आरजेडी ने उनका टिकट काट दिया था. पार्टी ने उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जिससे नाराज होकर रितु जायसवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था. उन्हें 60 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और आरजेडी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर पहुंच गया था. इसके बाद आरजेडी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
मुखिया के तौर पर बनाई पहचान
रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर काफी खास माना जाता है. मुंबई से सीतामढ़ी आकर उन्होंने सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में काम किया और अपने काम की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. पढ़ी-लिखी और सक्रिय महिला नेता के रूप में उनकी अच्छी छवि रही है।
वैश्य समाज पर पकड़
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी उन्हें अपने साथ जोड़कर वैश्य समाज और महिला वोटरों के बीच पकड़ मजबूत करना चाहती है. सीतामढ़ी, शिवहर और आसपास के इलाकों में युवाओं और महिलाओं के बीच उनकी अच्छी लोकप्रियता मानी जाती है. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है।















