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तृणमूल कांग्रेस बजट सत्र के आखिरी सप्ताह में राज्यसभा में उठा सकती महिला आरक्षण विधेयक, जानिए क्यों …

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस बजट सत्र के आखिरी सप्ताह में महिला आरक्षण विधेयक को राज्यसभा में उठा सकती है, ताकि उसे विधेयक से कानून की शक्ल दी जा सके। टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ ब्रायन इस बिल को उठा सकते हैं राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश करेगी TMC, जानिए क्यों जरूरी है यह कानून

लंबे समय से लोकसभा और राज्यसभा में प्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक को तृणमूल कांग्रेस बजट सत्र के आखिरी सप्ताह में राज्यसभा में उठा सकती है, ताकि उसे विधेयक से कानून की शक्ल दी जा सके। टीएमसी के राज्यसभा के फ्लोर लीडर डेरेक ओ ब्रायन उच्च सदन के नियम 168 के तहत सोमवार को जल्द से जल्द प्रस्ताव पेश करना चाहते हैं। प्रस्ताव के जरिए चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए जाएंगे, जिसके तहत ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में बेहद गिरावट देखी गई है। यही नहीं राष्ट्रीय संसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी में भी भारत का प्रदर्शन निराशाजनक है।

टीएमसी की ओर से राज्यसभा में उठाए जा रहे प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 में 156 देशों में 28 स्थान नीचे 140 वें स्थान पर आ गया है। मुख्य रूप से मंत्रियों के बीच महिलाओं की हिस्सेदारी में काफी गिरावट देखने को मिली है। जो 2019 में 23% से घटकर 2021 में 9.1% हो गया है। वर्तमान में इसका शेयर 14% ही है।

टीएमसी ओर से जारी होने वाले प्रस्ताव में कहा गया है कि दुनियाभर की राष्ट्रीय संसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी में भारत की रैंकिंग पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरी है। 1998 में भारत 95वें स्थान पर था। मार्च 2022 तक भारत 184 देशों में 144वें स्थान पर पहुंच गया है।

महिला आरक्षण विधेयक के लिए तृणमूल की जोर-आजमाइश को अपनी संसदीय टीम में 34% महिला सांसद मिलने के बाद एक राजनीतिक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएमसी पार्टी का नेतृत्व करने वाली ममता बनर्जी भारत की एकमात्र महिला सीएम भी हैं।

डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, “केंद्र सरकार की अपनी प्राथमिकताएं हैं। यह आपराधिक पहचान विधेयक और एमसीडी कानून को आगे बढ़ाना चाहता है। हम उनसे पूछ रहे हैं कि महिला सशक्तिकरण उनके एजेंडे में क्यों नहीं है? वर्तमान लोकसभा में 15% महिला सांसद हैं जबकि राज्यसभा में 12.2% हैं। तृणमूल नेता का तर्क है कि यह वैश्विक औसत 25.5% से बहुत कम है।

ओ ब्रायन का कहना है कि “कुल विधायकों में से केवल 8% भारत के सभी राज्यों में महिलाएं हैं। पिछली लोकसभा की शुरुआत में राष्ट्रपति ने कहा था, “मेरी सरकार हमारे समाज के विकास और राष्ट्र के विकास में हमारी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानती है। यह उन्हें संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

गौरतलब है कि महिला आरक्षण विधेयक, पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था। 2008 में यह विधेयक पारित होने के करीब आया लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने अपने सहयोगियों के बीच आम सहमति की कमी के बाद इसे लोकसभा में पेश नहीं किया।

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