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गांधी जयंती पर होंगी देश भर में सौ जिलों में पदयात्राएं, एकता परिषद सहित अन्य संगठनों की होगी भागीदारी…

नई दिल्ली (प्रसून लतांत)। एकता परिषद के संस्थापक और सर्वोच्च गांधीवादी संगठन सर्वोदय समाज के संयोजक राजगोपाल पीवी ने देश भर की संस्थाओं, संगठनों और खास कर लोगों से आजादी के 75वें साल पर एक खास अपील की है कि वे गांधी जयंती के मौके पर जगह जगह न्याय और शांति के लिए पदयात्राएं करें और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को व्यवहार में लाकर उनको श्रद्धांजलि दें। क्योंकि मौजूदा समय में विभिन्न समस्याओं का समाधान गांधी के विचारों में ही निहित है। गांधी हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं और वे सारी दुनिया के लिए एक पावर हाउस हैं,जिनसे प्रेरित होकर और सीख लेकर भावी दुनिया को बेहतर बनाया जा सकता है।

रविन्द्र सक्सेना के मुताबिक न्याय और शांति के लिए 21 सितंबर को देश के सौ जिलों में पदयात्रा की शुरुआत उपवास से होगी। पदयात्रा के दौरान पौधे लगाए जाएंगे। एकता को मजबूत करने के लिए सामूहिक भोज होंगे। साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न विभिन्न समस्याओं पर विचार किया जाएगा। गांवों की सुंदरता,शुद्ध जल,शिक्षा,श्रमिकों के पलायन आदि मुद्दों पर लोगों को जागरूक किया जाएगा और युवाओं को अहिंसात्मक अर्थ व्यवस्था से जोड़ने के प्रयास होंगे।

 रविन्द्र सक्सेना के मुताबिक वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक और समाज कर्मी राजगोपाल पीवी के नेतृत्व में देश के सौ जिलों में 21 सितम्बर से विभिन्न गांवों, शहरों और कस्बों में पदयात्रा शुरू होगी और विभिन्न पड़ावों पर सभाओं का आयोजन करते हुए गांधी जयंती पर संपन्न होगी। विभिन्न संस्थाओं और संगठनों को यात्रा का प्रारूप भेज दिया गया है और उसी के मुताबिक यात्रा की तैयारी भी की जाने लगी है। उनके मुताबिक इन यात्राओं में देश विदेश के प्रमुख और वरिष्ठ गांधीवादी विचारक और कार्यकर्ता भाग लेंगे। साथ ही भारी संख्या में युवाओं को शामिल किया जाएगा।

यात्रा के दौरान गांधी जी के प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए सामूहिक रूप से गाए जाएंगे। आजादी के 75वें साल पर निकाली जा रही पदयात्रा के दौरान लोगों अहिंसा और मानवता का पाठ पढ़ाया जाएगा। पदयात्रा की शुरुआत शांति के लिए उपवास से शुरू होगी। दूसरे दिन जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण मुक्ति पर केंद्रित होगी। तीसरे दिन पेड़ लगाए जाएंगे और रचनात्मक कार्यों को अंजाम दिया जाएगा। चौथे दिन जलवायु नीति पर विचार किया जाएगा। पांचवें दिन सामूहिक भोज होगा।छठे दिन गैर जरूरी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाएगा। सातवें दिन गांवों कि सुंदरता पर विचार किया जाएगा। आठवें दिन शुद्ध जल की उपलब्धता पर और नौवें दिन शिक्षा और खेल के जरिए शिक्षा के तौर तरीकों को कार्य रूप दिया जाएगा। दसवें दिन श्रमिकों के पलायन की समस्या और ग्याहरवे दिन युवाओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाया जाएगा। और पदयात्रा के बारहवें और अंतिम दिन विश्व अहिंसा दिवस पर गांधी जी को श्रद्धांजलि दी जाएगी और भविष्य की योजनाओं की घोषणाएं की जाएंगी ताकि पदयात्रा के बाद भी एक बेहतर दुनिया बनाने की दिशा में कार्य जारी रह सके।

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