लेखक की कलम से

मेरे प्रेम की कशिश …

मै जितनी
करीब तुमसे
तुम उतने दूर
मेरे प्रेम की कशिश
कम है शायद
या फिर
तुम्हारा प्रेम महान !

रोम रोम में
तुम हो
जिधर देखूं
बस तुम हो
जाने तुमसे
ये कैसा इश्क है
मुझसे ये
मिलता नहीं
मिल मुझसे
खिलता भी नहीं

प्रेम में
मौत नहीं
तुम बिन,
ये इश्क़
जीने देता
भी नहीं ❤️

 

 

©क्षमा द्विवेदी, प्रयागराज               

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