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बतरस लालच लाल की…

आगरा। ‘भगवान् की लीलायें त्रिभुवन को मोहित करने वाली हैं। वामन अवतार के मनोहर रूप पर मोहित हुई राजा बलि की पुत्री रत्नमाला की कामना भगवान ने कृष्ण अवतार लेकर पूर्ण की। रत्नमाला ने बलि की यज्ञशाला में पधारे भगवान् वामन के मनोहर रुप पर रीझकर मन ही मन उनको दूध पिलाने की इच्छा की। भगवान ने द्वापर में स्वयं कृष्ण रूप लिया और रतन माला को पूतना बनाकर उसे मोक्ष प्रदान किया।’

भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने पूतना वध का प्रसंग सुनाया। भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि अभी तक भगवान ने जितने भी अवतार लिए, वे केवल राक्षसों का संहार करने के लिए धारण किए। ऐसे में भक्ति योग का प्रसार न हो सका। सज्जनों को मोद, धरती, जल, नदी आदि जड़ तत्त्वों को प्रसन्नता और स्त्रियों को भक्ति मार्ग में लय करने के लिए ही भगवान ने धरती पर ये सुंदर लीलाएं की।

भगवान की माखन लीला, गोचारण लीला, मृदा भक्षण आदि ऐसी लीलाएं थी जिन्हें देखकर देवता भी मोहित हो गए। ब्रह्मा पर तो ऐसा मोह व्याप्त हुआ कि मात्र प्रभु से संवाद करने की इच्छा के चलते उन्होंने भगवान के सखा और बछड़े तक हर लिए। भगवान ने भी माया का विस्तार कर स्वयं ही प्रत्येक बछड़े और गोप बालक का रूप धारण किया और वर्ष भर तक प्रत्येक गाय का दूध पिया, हर घर का भोजन भर कर किया।

ब्रह्मा ने अनजाने में ही उन सभी ऋषि-मुनियों, देवताओं का मनचाहा कर दिया जो भगवान से लाड लड़ाने की कामना से ब्रज में गाय और गोपी रूप में अवतरित हुए थे। चीर- हरण लीला कर भगवान ने स्त्रियों को मर्यादा और धर्म की शिक्षा दी तो वहीं कालिय नाग का मान मर्दन कर उसे भय मुक्त कर दिया। असुरों का वध करके ब्रज के सरोवरों, कुंडों और वनों को और सुरम्य एवं सुगम बना दिया।

इंद्र का अभिमान तोड़कर उन्हें भी शिक्षा दी। जब लोकपाल के पद से उठकर वे स्वयं को ब्रज में पुजवा कर अभिमानी हो गए तब भगवान ने गोवर्धन धारण कर उनका दम्भ चूर- चूर कर दिया। भगवान को छप्पन भोग लगाने की परंपरा यहीं से प्रारंभ हुई।

 गोपाल धाम, आगरा में ऑनलाइन चल रही भागवत कथा 2 जुलाई तक चलेगी। फेसबुक पर इसका लाइव प्रसारण प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक हो रहा है।

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