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मोह ही है समस्त दुखों का मूल …

अयोध्या। ‘मानव का जन्म- मृत्यु आदि जीवन के समस्त कार्य व्यापार उसके कर्मों का फल हैं। कर्मों का प्रभाव इतना गहरा है कि भक्तों के कर्मों के कारण भगवान को भी अवतार लेना पड़ता है, जैसे जय- विजय के कारण भगवान को चार बार अवतार ग्रहण करना पड़ा। मनुष्य मोह में फंस कर ही अपने लिए दुखों का जंगल तैयार कर लेता है।’ आज 28 जून को श्रीमद्भागवत् कथा के तीसरे दिन यह प्रवचन डॉ. दीपिका उपाध्याय ने दिए श्रीगोपाल धाम, आगरा में दिये। ऑनलाइन भागवत कथा में ऋषभदेव अवतार की सुंदर कथा का वर्णन किया।

राजा प्रियव्रत के यशस्वी वंश में हरि ऋषभदेव रूप में अवतरित हुए। ऋषभदेव जैसे महान योगी ने एक आदर्श राजा के रूप में कार्य किया। यहां तक कि सूखा पड़ने पर अपने योग बल से अपने राज्य में वर्षा तक की। अंततः अपने पुत्र भरत को राजकाज देकर उन्होंने अवधूत वृत्ति अपना ली।

ऋषभदेव का यह प्रसंग बताता है कि सामर्थ्यवान पुरुषों को आचरण का दोष नहीं लगता किंतु उनके प्रत्येक आचरण का अंधानुकरण सामान्य जनों को अवश्य रसातल की ओर ले जाता है। गंगा, अग्नि और चन्द्रमा इसका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं।

इसी प्रकार ऋषभदेवजी अवधूत वृत्ति के बाद भी श्रीहरि अंग में समा गए, किंतु सामान्य जन के लिए उनके बाह्य वेशभूषा का अनुकरण वर्जित है। वेद, ब्राह्मण और यज्ञ पुरुष के निंदक कभी भी सद्गति प्राप्त नहीं कर सकते।

ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही ‘अजनाभ वर्ष’ का नाम ‘भारतवर्ष’ पड़ा। भरत कुशलता के साथ राज्य संभालने के बाद अपने पुत्र को राज्य सौंप कर वन में चले गए, किंतु मृगशावक के मोह में बंध कर उन जैसे ज्ञानी को भी अगले जन्म के लिए मृग योनि में जाना पड़ा। मनुष्य को सांसारिक मोह से बचना चाहिए वरना वह अपना यह जन्म और अगला जन्म भी व्यर्थ कर सकता है।

अजामिल की कथा बताती है कि हमें केवल अपना आचरण ही नहीं बल्कि वातावरण की स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। हमारे कर्मों पर वातावरण का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। डॉ. दीपिका उपाध्याय ने आगे प्रजापति दक्ष द्वारा देवर्षि नारद को दिए श्राप का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि दिव्य पुरुषों के श्राप भी लोक कल्याण के लिए होते हैं। दक्ष ने नारद मुनि को श्राप दिया तो नारद समस्त लोकों में आज भी हरि नाम का संकीर्तन करते और देवों का कार्य सिद्ध करते भ्रमण करते हैं।

 पंडित गोपाल दास शर्मा की स्मृति में चल रही इस ऑनलाइन कथा का प्रसारण 2 जुलाई तक प्रतिदिन शाम 4:00 से 6:00 बजे तक होगा।

 

©डॉ. दीपिका उपाध्याय, आगरा                  

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