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त्रिगुणों से भी मुक्ति दिलाने वाले हैं भगवान शिव …

श्रावण मास के पावन अवसर पर गोपाल धाम, आगरा में शिव महापुराण का आयोजन हुआ। मान्यता है कि चातुर्मास में जब हरि योगनिद्रा में चले जाते हैं तब सृष्टि की रक्षा एवं पालन का कार्य भगवान शिव करते हैं। इसलिए इस समय शिव पुराण कथा श्रवण का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शिवमहापुराण के इस महत्त्व को देखते हुए सृष्टि के कल्याणार्थ आज 13 अगस्त से कथा प्रारंभ हुई जो 19 अगस्त तक चलेगी। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए कलश यात्रा का आयोजन नहीं किया गया।

कथा का प्रारंभ करते हुए कथा वाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने कहा शिव की भक्ति को पाने के तीन ही प्रमुख साधन है- श्रवण, कीर्तन और मनन। प्रत्येक मनुष्य अपने बाह्य नेत्रों से भगवान शिव का दर्शन नहीं कर सकता इसलिए भगवान शिव की कथा सुननी चाहिए। उनके नाम, गुण और कथाओं को बार-बार वाणी से दोहराना ही कीर्तन है और भगवान महादेव के प्रसंगों का मनन ही जीवन का परम उद्देश्य है। भगवान शिव की पूजा का महत्व बताते हुए कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव ही एकमात्र है जिनकी पूजा लिंग रूप में और मूर्ति रूप में की जाती है। अन्य देवता निराकार नहीं पूजे जाते। इसका कारण भगवान शिव का सृष्टि से पहले साकार रुप में आना है। सुप्रसिद्ध ब्रह्मा विष्णु के विवाद में भगवान शिव ने लिंग रूप में प्रकट होकर विवाद सुलझाया था, तभी से जगत में लिंग पूजा प्रारंभ हुई।

सत्य बोलने के कारण इस विवाद में भगवान विष्णु को भगवान शिव ने अपने हृदय में स्थान दिया और सृष्टि में सर्वत्र पूजा जाने का वरदान भी दिया। वहीं पर सत्व, राजस और तामस गुणों का रोध करने के कारण भगवान शिव सृष्टि के प्रथम गुरु कहलाए।

डॉ. उपाध्याय ने शिव भक्ति की महिमा बताते हुए गुणनिधि की कथा सुनाई जिसने अनजाने में ही शिवलिंग पर पड़ रहा अंधकार अपने वस्त्रों को जलाकर दूर किया। इसी पुण्य से वह अगले जन्म में कलिंग देश का राजा बना। पूर्व जन्म के प्रभाव से उसने अपने राज्य के शिवालयों में दीपदान की व्यवस्था की और अगले जन्म में ऋषि विश्रवा का पुत्र कुबेर हुआ। तप के द्वारा उसने भगवान शिव की मैत्री प्राप्त की।

कथावाचक ने बताया कि शिवलिंग का अभिषेक कर हमें आत्म शुद्धि करनी चाहिए। शिवालय में दीपदान से ज्ञान, नैवेद्य अर्पित करने से आयु वृद्धि, धूप से धन प्राप्ति, गंध अर्पित करने से पुण्य और तांबूल अर्पित करने से भोगों की प्राप्ति होती है। भगवान शिव भक्तों का कल्याण सदैव करते हैं इसीलिए उन्होंने नारद मुनि का अहंकार दूर करने के लिए हरि को प्रेरणा दी। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए इस कथा का आयोजन एवं फेसबुक पर सीधा प्रसारण प्रतिदिन शाम 3:00 से 6:00 बजे हो रहा है।

 

©डॉ. दीपिका उपाध्याय, आगरा                  

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