
केरलम में वीडी सतीशन जमीनी योद्धा का सम्मान
• डॉ. सुधीर सक्सेना
वदासरी दामोदरन (वीडी) सतीशन अब साक्षर-राज्य केरलम के मुख्यमंत्री होंगे। दस दिनों की माथा-पच्ची और रायशुमारी के उपरांत अंततः 14 मई को दिल्ली में उनके नाम का ऐलान हो गया। गुरुवार की सुबह सुश्री दीपा दासमुंशी के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन तथा वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की मौजूदगी में इस आशय की घोषणा से अंततः अटकलों का कुहासा छंट गया और यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी नेतृत्व अपने जमीनी योद्धा का चयन करने के मूड में है और केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला कुर्सी की दौड़ में पिछड़ गये हैं। यह ऐलान इसलिये भी मानीखेज था, क्योंकि यह खबर छनकर आ रही थी कि निर्वाचित विधायकों का बहुमत वेणुगोपाल के साथ है, जिन्हें पार्टी में दिल्ली की किल्ली के नजदीक माना जाता है। लेकिन बुधवार की शाम पहले पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के माकन, दासमुंशी और वासनिक से विमर्श ने सतीशन का नाम आगे कर दिया। इसके बाद घड़ी के कांटे तेजी से घूमे। गुरुवार की सुबह राहुल गाँधी ने केसी वेणुगोपाल से चर्चा की। तकरीबन तीस मिनट की बातचीत में राहुल अपने निकट सहयोगी को दौड़ से हटने के लिये मनाने में सफल रहे और इसके कुछ घंटो बाद विधिवत वीडी के नाम की घोषणा कर कर दी गयी।
31 मई, सन 1964 को नेत्तूर में जनमे सतीशन खाँटी कांग्रेसी नेता हैं। छात्र जीवन में वह एनएसयूआई से जुड़ गये। सन 1986-87 में वह महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। यूनिवर्सिटी आफ केरल से उन्होंने एलएलएम किया और हाईकोर्ट में दस साल प्रैक्टिस। सन 1996 में उन्होंने परवूर से असेंबली का पहला चुनाव लड़ा, लेकिन 'प्रथम ग्रासे मक्षिकापातः' की तर्ज पर वह सीपीआई के पी. राजू से हार गये। सन 2001 के चुनाव में उन्होंने राजू हिसाब चुकता किया और इसके बाद क्रमशः केएम दिनकरन, रवीन्द्रन, शारदा मोहन और एमटी निक्सन जैसे नेताओं को हरा कर लगातार असेंबली में पहुंचे। सन 2021 में रमेश चेन्निथला के स्थान पर नेता प्रतिपक्ष बने और तदंतर विधानसभा के भीतर और बाहर अपनी सक्रियता से सबका ध्यान आकृष्ट किया। केरलम के कांग्रेस नेताओं में वह संघर्ष, साख और सक्रियता के मामले में सबसे आगे हैं। कोट्टायम के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक निजाम सैयद के मुताबिक सतीशन इज द बेस्ट च्वॉयस फॉर चीफ मिनिस्टरशिप। जनभावनाओं का ज्वार उनके साथ है और कार्यकर्ता उनके पीछे।
आखिर क्या वजह है कि निजाम व अन्य मलयाली पत्रकार सतीशन को 'सर्वोत्तम पसंद' निरूपित कर रहे हैं वजह साफ है। सतीशन जमीनी योद्धा है और आडंबर से कोसों दूर। वह कुशल और प्रभावशाली वक्ता हैं और उन्हें सुनना 'सांद्र अनुभव' से गुजरना है। वह लेखक तो नहीं, अलबत्ता गंभीर पाठक हैं और साहित्यिक जलसों में उन्हें आग्रहपूर्वक बुलाया जाता है। आधुनिक मलयाली साहित्य में उनकी गहरी रूचि है और वह जेन-जी में बेहद लोकप्रिय है। उन्हें सियासी नजूमी भी माना जा सकता है, क्योंकि चुनावों में उनकी भविष्यवाणियाँ खरी उतरती रही हैं। इस दफा तो उन्होंने सार्वजनिक ऐलान कर कर दिया था कि यदि यूडीएफ को सौ से कम सीटें मिलीं तो वह राजनीति सन्यास ले लेंगे। केरलम में काँग्रेसनीत गठबंधन को जिताने में उन्होंने रात-दिन एक कर दिया। पार्टी में उन्हें 'टास्क मास्टर' माना जाता है और इसके चलते वह प्रियंका और राहुल के विश्वासपात्र बनकर उभरे। मासांत में वह अपना 62वीं वर्षगांठ बतौर सीएम मनायेंगे। उनका टास्क मास्टर होना यकीनन उम्मीदें जगाता है। त्रिवेंद्रम और दिल्ली में चले दस दिनी घटनाक्रम ने यह भी दर्शा दिया कि महत्वाकांक्षी शशि थरूर के नाम पर कहीं कोई विचार नहीं किया गया।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।राष्ट्रीय , अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरी समझ रखते हैं । भोपाल में निवास )
















