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तुर्की के पास ज्यादा सैनिक, इजरायल के पास तकनीकी बढ़त; युद्ध हुआ तो कौन पड़ेगा भारी?

नई दिल्ली
अमेरिका के दो महत्वपूर्ण सहयोगी- इजरायल और तुर्की के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में काफी तनाव बढ़ा है. गाजा युद्ध, सीरिया में प्रभाव, पूर्वी भूमध्य सागर में ऊर्जा संसाधनों पर विवाद और राजनीतिक बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ा दी है. कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये दोनों देश कभी सीधे युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं.

इस सवाल का जवाब समझने के लिए ग्लोबल फायरपावर (Global Firepower) 2026 की रिपोर्ट सबसे विश्वसनीय आधार है. इसमें लोगों की ताकत, हथियार, बजट, भूगोल और अन्य 60 से ज्यादा कारकों को मिलाकर पावर इंडेक्स निकाला जाता है. जितना छोटा स्कोर, उतनी ज्यादा ताकत.

2026 में तुर्की का स्कोर 0.1975 है. वह दुनिया में 9वें स्थान पर है. इजरायल का स्कोर 0.2707 है. वह 15वें स्थान पर है. मिडिल ईस्ट में तुर्की पहले और इजरायल दूसरे स्थान पर हैं. यह आंकड़े साफ बताते हैं कि संख्या के मामले में तुर्की आगे है, लेकिन इजरायल की ताकत गुणवत्ता और अनुभव में छिपी है.

दोनों देश अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं. इजरायल को अमेरिका से भारी सैन्य सहायता और एडवांस हथियार मिलते हैं, जबकि तुर्की नाटो का सदस्य है. अमेरिका के साथ लंबे समय से साझेदारी रखता है. फिर भी दोनों के बीच मतभेद गहरे हैं.

तुर्की ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा उद्योग को बहुत मजबूत किया है. ड्रोन, टैंक तथा जहाजों का घरेलू उत्पादन बढ़ाया है. इजरायल अपनी तकनीकी श्रेष्ठता, खुफिया क्षमता और युद्ध के अनुभव पर निर्भर रहता है.  

सैनिक कितने और तैयारी कैसी?
तुर्की की सेना लगभग 3.55 लाख से 4.81 लाख के बीच है, जबकि रिजर्व बल करीब 3.78 लाख हैं. इसके अलावा पैरामिलिट्री बल भी बड़े हैं. इजरायल की सेना करीब 1.70 लाख है, लेकिन उसका रिजर्व सिस्टम बेहद मजबूत है. लगभग 4.65 लाख रिजर्विस्ट कुछ दिनों में युद्ध के लिए तैयार हो सकते हैं.

इजरायल का पूरा समाज सैन्य सेवा से जुड़ा है. युद्ध की स्थिति में तेजी से जुटाव संभव है. तुर्की की जनसंख्या करीब 8.5 करोड़ है, जबकि इजरायल की करीब एक करोड़. इसलिए लंबे युद्ध में तुर्की को लोगों की संख्या का फायदा मिल सकता है. लेकिन इजरायल की सेना अत्यधिक प्रशिक्षित, अनुभवी और आधुनिक हथियारों से लैस है.

दोनों देशों की रक्षा बजट में भी अंतर है. इजरायल अपने जीडीपी का काफी बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च करता है, जो उसकी छोटी आबादी के बावजूद उच्च स्तर की तैयारी दिखाता है.

जमीनी ताकत: नंबर्स या क्वालिटी
जमीनी बलों में तुर्की स्पष्ट रूप से संख्या में आगे है. तुर्की के पास करीब 2200 से 2284 मुख्य युद्धक टैंक हैं. इनमें लेपर्ड 2ए4, अपग्रेडेड एम60 और नए स्वदेशी अल्ताय टैंक शामिल हैं. आर्टिलरी, इन्फेंट्री फाइटिंग व्हीकल और आर्मर्ड पर्सनल कैरियर की संख्या भी तुर्की के पास काफी ज्यादा है. कुल सक्रिय जमीनी वाहन 13,000 से अधिक बताए जाते हैं.

इजरायल के पास मुख्य युद्धक टैंक करीब 400 मर्कावा एमके4 हैं, हालांकि स्टोरेज में और भी हो सकते हैं. मर्कावा टैंक दुनिया के सबसे सुरक्षित टैंकों में गिने जाते हैं. इनमें ट्रॉफी एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है जो एंटी-टैंक मिसाइलों को रोकने में मदद करता है.

इजरायल की आर्टिलरी और अन्य वाहन संख्या में कम हैं लेकिन शहरी युद्ध और सटीक हमले के लिए बेहद प्रभावी हैं. लंबे समय तक बड़े क्षेत्र पर कब्जा करने वाले युद्ध में तुर्की की संख्या बढ़त काम आ सकती है. छोटी दूरी के तेज और तकनीकी युद्ध में इजरायल की गुणवत्ता फायदेमंद साबित हो सकती है.

वायु सेना: इजरायल की तकनीकी बढ़त
हवा में स्थिति कुछ अलग है. तुर्की के पास कुल सैन्य विमान करीब 1067 से 1101 हैं, जिनमें लगभग 299 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट शामिल हैं. इसमें ज्यादातर F-16 और कुछ पुराने विमान हैं. तुर्की ने हाल के वर्षों में ड्रोन तकनीक में बहुत प्रगति की है.

बेरक्तार टीबी2, आकिंसी और किजिलेलमा जैसे ड्रोन विश्व स्तर पर चर्चा में रहे हैं. इजरायल के पास कुल विमान करीब 534 हैं, लेकिन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट करीब 284 हैं. इनमें एफ-35आई आदिर स्टेल्थ फाइटर, एफ-15 और एफ-16 शामिल हैं. इजरायल की वायु सेना इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सटीक हमले और खुफिया जानकारी जुटाने में बेहद एडवांस मानी जाती है.

एफ-35 की स्टेल्थ क्षमता और इजरायल द्वारा खुद विकसित सिस्टम उसे गुणात्मक बढ़त देते हैं. लंबे हवाई युद्ध में संख्या का फायदा तुर्की को हो सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में इजरायल की वायु श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभा सकती है. दोनों देशों के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं.

नौसेना की ताकत: तुर्की की स्पष्ट बढ़त
समुद्र में तुर्की काफी आगे है. उसके पास करीब 195 से 217 युद्धपोत हैं, जिनमें 12 से 13 पनडुब्बियां शामिल हैं. तुर्की की नौसेना मावी वतन (नीला वतन) रणनीति के तहत पूर्वी भूमध्य सागर, काला सागर और उससे आगे प्रभाव बढ़ाने पर काम कर रही है.

नए मिग्लेम फ्रिगेट, टीसीजी अनादोलू जैसे जहाज इसकी क्षमता बढ़ा रहे हैं. इजरायल की नौसेना छोटी है. करीब 52 से 55 जहाज और 5 से 6 पनडुब्बियां हैं. ये ज्यादातर तटीय सुरक्षा और रक्षा पर केंद्रित हैं.

इजरायल की डॉल्फिन क्लास पनडुब्बियां परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रख सकती हैं, जो रणनीतिक महत्व रखती हैं. खुले समुद्र में लंबे अभियान के लिए तुर्की बेहतर स्थिति में है, जबकि इजरायल अपनी तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाए रखता है.

अन्य महत्वपूर्ण कारण: बजट और परमाणु
इजरायल का रक्षा बजट अक्सर तुर्की से ज्यादा या बराबर बताया जाता है, लेकिन जीडीपी के अनुपात में इजरायल कहीं ज्यादा खर्च करता है. तुर्की अपनी रक्षा उद्योग को तेजी से आत्मनिर्भर बना रहा है. टैंक, ड्रोन, मिसाइल और जहाजों का घरेलू उत्पादन बढ़ा है.

इजरायल की ताकत उसके एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, साइबर क्षमता, खुफिया एजेंसियों और अमेरिका से मिलने वाले निरंतर समर्थन में है. सबसे बड़ा अंतर परमाणु क्षमता का है. इजरायल के पास अनुमानित 90 परमाणु हथियार माने जाते हैं, जबकि तुर्की के पास परमाणु हथियार नहीं है. यह रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करता है.

क्या सीधा युद्ध संभव है?
दोनों देशों के बीच सीधा युद्ध की संभावना बहुत कम है. दोनों अमेरिका के सहयोगी हैं. नाटो तथा अन्य मंचों पर जुड़े हुए हैं. युद्ध शुरू होने पर क्षेत्रीय अस्थिरता बहुत बढ़ जाएगी. अमेरिका सहित कई शक्तियां इसमें दखल देंगी. दोनों देश मुख्य रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं- इजरायल गाजा, लेबनान और ईरान से जुड़े खतरों से, तुर्की सीरिया, कुर्द मुद्दे और भूमध्य सागर से.

संख्या में तुर्की आगे है, लेकिन इजरायल की तकनीकी श्रेष्ठता, युद्ध अनुभव और परमाणु क्षमता किसी भी संघर्ष को बहुत महंगा बना सकती है. ग्लोबल फायरपावर 2026 के आंकड़े बताते हैं कि तुर्की पारंपरिक युद्ध की क्षमता में मजबूत है, जबकि इजरायल गुणवत्ता और निवारक शक्ति में. दोनों के बीच तनाव बना रह सकता है, लेकिन पूरे पैमाने का युद्ध दोनों के हित में नहीं है.

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