मध्य प्रदेश

स्वरूपानंद ने करवाया था 225 फीट ऊंचे मंदिर का निर्माण, नवरात्र में विविध सामग्री से होता है त्रिपुर सुंदरी का श्रृंगार …

भोपाल/नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव तहसील के ग्राम झौंतेश्वर के परमहंसी गंगा आश्रम में चौंसठ योगिनी सहित भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुरी सुंदरी माता की मनोहारी प्रतिमा विराजित हैं। द्विपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की तपस्थली का यह मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना है। मंदिर में चांदी के पात्रों से गर्भगृह सुसज्जित है। जिसमें भगवती की प्रतिमा विराजित है व परिक्रमा में चौंसठ योगिनी की प्रतिमाएं विराजित हैं। शंकराचार्य ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। जिसका कार्य वर्ष 1965 में शुरू हुआ और करीब 15 वर्ष में बनकर तैयार हुआ।

26 दिसंबर 1982 को मंदिर में त्रिपुरी सुंदरी माता की प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह मंदिर विशाल संरचना के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र में हर दिन यहां माता की प्रतिमा का विविध सामग्री से शृंगार होता है। अखंड ज्योति जलती है। यह माता राजराजेश्वरी का विद्यापीठ मंदिर है। शंकराचार्य के अथक प्रयासों से पूरे भारत में नित्या माता यहीं विराजित हैं। मंदिर के पुजारी ब्रह्मचारी ध्यानानंदए सहयोगी विमलानंद महाराज हैं।

मातृशक्ति के संवर्धक उभय भारती महिला आश्रम की स्थापना

मातृशक्ति के संवर्धक उभय भारती महिला आश्रम ने दलितों, शोषितों, आदिवासियों के उत्थान के लिए कार्य किए हैं, वहीं उन्होंने मातृशक्ति के संवर्धन के भी अनेक उपक्रम स्थापित किए हैं। देवी के चरणों में अनन्य आस्था रखने वाले आचार्य के द्वारा ऐसे प्रयास स्वाभाविक हैं। उन्होंने देश में आध्यात्मिक उत्थान महिला मंडलों की स्थापना के साथ.साथ माताओं की ऊर्जस्विता के जागरणार्थ हिंगलाज सेना, वैदुष्य संवर्धनार्थ काशी विदुषी परिषद् और उनमें आत्मविश्वास के जागरण के लिए उभय भारती महिला आश्रम की स्थापना की है।

अनेक वेद पाठशालाओं की स्थापना कर वेद विद्या के संरक्षण में जुटे रहे

महाराजश्री ने अनेक वेद पाठशालाओं की स्थापना द्वारा वेद विद्या के संरक्षण के अपने दायित्व को निभाया है। देश भर में महाराज द्वारा अनेकों बाल विद्यालय, आयुर्वेद औषधालय, अनुसंधानशाला, आश्रम, आदिवासी शाला और अन्नक्षेत्र जैसी प्रवृत्तियां संपादित हो रहीं हैं। शंकराचार्य ने सांकल घाट में भगवान आदिशंकराचार्य का विशाल मंदिर निर्माण कराया है। साथ ही मवई में शंकराचार्य नेत्रालय की स्थापना कराई है।

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