Breaking News

बंगाल से मोदी सरकार की रार : सचिव से दीदी के सलाहकार बने अलापन को केंद्र का नोटिस, जवाब न देने पर हो सकती है एफआईआर …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे भले आ गए हों, लेकिन सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा के नरेंद्र मोदी के बीच खींचतान कम होती नहीं दिख रही है। प्रधानमंत्री की बैठक में नहीं पहुंचने वाले बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को लेकर मोदी और ममता सरकार आमने-सामने है। इस मामले से परिचित एक अधिकारी ने कहा है कि मोदी सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अलपन बंद्योपाध्याय को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया है। नोटिस का तीन दिनों के अंदर जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ एफआईआर भी की जा सकती है।

अधिकारी ने कहा कि “डीओपीटी (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) के आदेश की अवहेलना करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभाग द्वारा उपयुक्त कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंदोपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त किया है।

वहीं, बंगाल भाजपा के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शामिल नहीं होने को लेकर मंगलवार को यह कहते हुए नया विवाद छेड़ दिया कि लोक सेवा पर अहंकार हावी हो गया है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री चौबीसों घंटे जनसेवा में लगी हैं और राज्य के हितों को लेकर अपनी चिंता के मद्देनजर हर कदम उठाती हैं।

भाजपा के जगदीप धनखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कलाईकुंडा में एक बैठक से पहले उनसे बात की थी और संकेत दिया था कि यदि विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी इसमें मौजूद होंगे, तो वह इसमें शामिल नहीं होंगी। धनखड़ ने ट्वीट किया, ”मुख्यमंत्री ने 27 मई को रात 11 बजकर 16 मिनट पर संदेश दिया, ‘क्या मैं बात कर सकती हूं, अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया, ”इसके बाद उन्होंने फोन पर संकेत दिया कि यदि विधायक शुभेंदु अधिकारी प्रधानमंत्री की चक्रवात यास संबंधी समीक्षा बैठक में शामिल होंगे, तो वह और अन्य अधिकारी इसका बहिष्कार करेंगे। लोक सेवा पर अहंकार हावी हो गया।”

बैठक में अधिकारी, धनखड़ के अलावा भाजपा सांसद देबश्री चौधरी भी मौजूद थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बैठक में इसलिए भाग नहीं लिया, क्योंकि प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री की बैठक में भाजपा के किसी विधायक के उपस्थित होने का कोई मतलब नहीं है। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हालिया विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से हराया था।

ममता बनर्जी ने सोमवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा था, ”मैं सिर्फ आपसे बात करना चाहती थी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच आम तौर पर जिस तरह से बैठक होती है उसी तरह से, लेकिन आपने अपने दल के एक स्थानीय विधायक को भी इस दौरान बुला लिया जबकि प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री की बैठक में उनके उपस्थित रहने का कोई मतलब नहीं था।” ममता बनर्जी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि उन्हें बैठक में राज्यपाल और अन्य केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति पर कोई आपत्ति नहीं थी।

कलाईकुंडा प्रकरण के बाद, मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय की सेवा को लेकर केंद्र और राज्य के बीच तनातनी एक बार फिर देखने को मिली। बंदोपाध्याय बैठक के लिए मुख्यमंत्री के साथ आए थे। पश्चिम बंगाल काडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी बंदोपाध्याय 60 वर्ष के होने पर सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन केंद्र ने मौजूदा कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में उनके काम को देखते हुए उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के रूप में तीन महीने का कार्य विस्तार दिया था। इसके बाद, केंद्र ने एक आकस्मिक फैसले में 28 मई को बंदोपाध्याय की सेवाएं मांगी थीं और राज्य सरकार को प्रदेश के शीर्ष नौकरशाह को तत्काल कार्यमुक्त करने को कहा था। बनर्जी ने इस मामले पर सोमवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और बंदोपाध्याय को सेवानिवृत्त होने की अनुमति देने के बाद उन्हें तीन साल के लिए अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया।

error: Content is protected !!