रोड नहीं तो वोट नहीं : आचार संहिता के चलते नहीं हो पा रहा मरम्मत

कोरबा (पाली)। नगरीय निकाय चुनाव का आगाज हो चुका है। जिसके लिए कांग्रेस-भाजपा पार्षद प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगने के बाद हर वार्ड में चुनावी हलचल आरंभ हो चुका है और प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों में मतदाताओं को रिझाने अलादिन के चिराग की तरह जी-हुजूरी आका को चरितार्थ करने में जुट गए हैं। लेकिन पाली से होकर गुजरी मुख्यमार्ग की जर्जर स्थिति से विगत 4 माह से जूझती नगर की आधी आबादी से ज्यादा जनता सड़क निर्माण-मरम्मत कार्य को लेकर रोड नहीं तो वोट नहीं के अलाप को लेकर नगरीय निकाय चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर चुके है।

ज्ञात हो कि बीते भारी बारिश के कारण जिले के मुख्यमार्गों सहित नदी-नालों पर निर्मित पुल-पुलिया बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे। जिन्हें जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य कराकर आवागमन बहाल किया गया था। सड़क दुर्दशा की सबसे अधिक त्रासदी पाली नगरीय क्षेत्र में देखने को मिली। जहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग डूमरकछार से लेकर ट्रांसपोर्ट नगर पाली तक की सड़क बेहद खराब हो चुकी है। जिसके कारण जर्जर मार्ग की वजह से धूल प्रदुषण बढ़ गया है और दोपहिया-चारपहिया वाहनों की आवाजाही से दिनभर धूल का गुबार छाया रहने से दुर्घटना का भय बना रहता है। कई वाहन सवार तो उड़ते धूल के कारण दुर्घटनाग्रस्त होकर चोटिल भी हो चुके है।

वर्तमान में जिस तरह की स्थिति सामने आ रही है उसमें सड़क की समस्या अहम् है। वर्ष 2009 में ग्राम पंचायत से नगर पंचायत के अस्तित्व में आए पाली नगर से होकर गुजरी मुख्यमार्ग की ऐसी दुर्दशा पहले कभी नहीं देखने को मिली जितनी कि वर्तमान समय में है। जिले के पाँच नगरीय निकायों में पाली नगर पंचायत सबसे कम मतदाता संख्या वाला निकाय है। जहाँ 15 वार्डों में कुल मतदाता संख्या 4031 है। जिसमें महिला मतदाता की संख्या 2019 तथा पुरुष मतदाता 2012 है। सड़क निर्माण, मरम्मत कार्य कराए जाने की लड़ाई को लेकर नगर के व्यापारी एवं आम नागरिकगण जिस प्रकार सड़क पर उतरे है।

उक्त बहिष्कार आंदोलन असरकार रहता है या नहीं यह मुख्य विषय है। क्योंकि पाली नगर के लिए डूमरकछार से मुनगाडीह तक सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य हेतु शासन से लगभग 7 करोड़ की स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर भी खुल चुका है। लेकिन ऐन नगरीय निकाय चुनाव में लागू आदर्श आचार संहिता के कारण सड़क का कार्य लटक गया है ऐसी जानकारी सामने आयी है। दूसरी और नगर के व्यपारियों सहित आम जनता रोड नहीं तो वोट नहीं के अलाप पर स्थानीय चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर चुके है। अब देखना यह है कि उत्पन्न इस समस्या का निराकरण किस प्रकार होती है…?