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नर्मदा परिक्रमा मार्ग बोरास जहां साल भर मेला जैसा माहौल रहता है …

नर्मदा परिक्रमा भाग -26

अक्षय नामदेव। मांगरोल रामनगर से 30 मार्च 2021 मंगलवार को सुबह 10:00 बजे रवाना होकर हम बरहा के रास्ते केतुघान जा रहे थे। अन्य दिनों की अपेक्षा धूप में कुछ ज्यादा ही तेजी थी। वैसे होली के बाद गर्मी बढ़ ही जाती है। लगभग 11:30 बजे हम केतु धान घाट पहुंच चुके थे।

केतु घान घाट आंजन, खरवास एवं नर्मदा नदी का संगम स्थल है। यहां बड़ी संख्या में लोग स्नान ध्यान कर रहे थे। होली पर्व के बाद फुर्सत लोगों की भीड़ भी यहां जमी थी। परिक्रमा वासी तो प्रायः नर्मदा तट पर दिखाई दे ही  जाते हैं। हमने केतु घान घाट संगम में पूजा अर्चना की तथा चुनरी चढ़ाई। यहां घाट के आसपास कोई वृक्ष इत्यादि नहीं है इसके बावजूद हम यहां तक दर्शन करते काफी देर तक बैठे रहे। बाद में हम नर्मदा तट बोरास के लिए रवाना हो गए।

नर्मदा तट बोरास पौराणिक महत्त्व का स्थान है इसलिए यहां वर्ष भर मेला जैसा लगा रहता है। बोरास में नर्मदा का बड़ा चौड़ा पाट है परंतु नर्मदा उत्तर तट छोड़कर दक्षिण तट में ही सिमटी हुई है। उत्तर तट का पूरा हिस्सा रेत ही रेत है जिसके कारण बोरास में युद्ध स्तर पर रेत का उत्खनन एवं परिवहन कार्य चल रहा है। कड़ी तेज धूप में हम रेत में नर्मदा तट में जाकर पूजन अर्चन किए एवं तट पर स्थित एक चाय दुकान में चाय पीने के लिए बैठ गए। यदि तट के ये दुकान ना हो तो यहां अभी धूप से बचने की कोई व्यवस्था नहीं है। पेड़ का नामोनिशान तो दूर-दूर तक नहीं दिखाई देता।

बोरास घाट में रेत की इतनी अधिकता है कि हमारी गाड़ी एक जगह रेत में फंस ही गई। ड्राइवर बनवारी ने खूब प्रयास किया पर गाड़ी फंसी तो फंसी,,।

परिक्रमा वासियों की गाड़ी फंसी देख आसपास के दुकानदारों ने सहानुभूतिवश आकर धक्का देकर निकालने का भी प्रयास किया परंतु गाड़ी निकलने से रही। दोपहर के लगभग 1:00 बजने को आए थे तेज धूप में सभी परेशान हो रहे थे तभी एक दुकानदार ने कहा कि पास में एक बाबा शिविर लगाकर रहते हैं वहां भंडारा चल रहा है आप लोग प्रसाद ग्रहण कर लीजिए फिर गाड़ी निकालने का सोचिएगा। हम बाबा के शिविर पहुंचे तो देखा बाबा वहां परिक्रमा वासियों के सेवार्थ भंडारा चला रहे हैं। शिविर के अंदर बाबा बैठने वाली जगह में कूलर भी लगा दिए हैं ताकि आगंतुकों को कोई परेशानी ना हो। हम वहां कुछ देर विश्राम करते रहे तथा बाबा से सत्संग चर्चा कर वहां भंडारा में रोटी सब्जी और खोवे का हलवा प्रसाद ग्रहण किया।

प्रसाद ग्रहण करने के बाद दिमाग में फिर से काम करना शुरू किया।मैं बाबा के शिविर से बाहर निकल कर गाड़ी निकालने की जुगत लगाने लगा। रेत ले जा रही एक ट्रैक्टर को रोका और उससे आग्रह किया कि गाड़ी निकालने में वह मदद कर दे। उसने कहा-भैया मैं आपकी गाड़ी निकालने में मदद करना चाहता हूं पर मेरे पास टोचन नहीं है। अगर टोचन मिल जाए तो मैं गाड़ी निकाल दूंगा। मैंने कहां ठीक है मैं टोचन का इंतजाम करता हूं तब तक ट्रैक्टर वाला रेत पहुंचाने चला गया।

मैं घाट पर लगी एक खिलौने वाले दुकानदार से जाकर पूछा स्कूटर होगी क्या? मैं सामने गांव में टोचन के लिए रस्सी खरीदने जाऊंगा। तभी वहां बैठे एक युवा पंडित ने  कहा चलिए मैं आपके साथ चलता हूं। पंडित की स्कूटर में हम गांव गए परंतु होली का दूसरा दिन होने के कारण दुकानें भी बंद थी। अब हम नर्मदा घाट पर वापस आ गए। पंडित कहीं चले गए।

मैं विचार मग्न था की गाड़ी कैसे निकाली जाए। तभी फिर एक ट्रैक्टर वाला जाता दिखा। मैंने उसे हाथ देकर रोका तथा  उससे गाड़ी निकालने में मदद का आग्रह किया। हमारी समस्या को समझते हुए उसने कहा कि रुकिए मैं टोचन लेकर आता हूं ,तब आपकी गाड़ी निकल पाएगी कह कर वह चला गया। पहले तो लगा कि वह बहाना बनाकर निकल गया परंतु 10 मिनट बाद वह अपनी रेत भरी ट्राली कहीं खड़ी कर के यहां हमारी गाड़ी निकालने आया था। उसके पास एक लंबी छड़ थी। छड़ को दोनों किनारे मोड़ कर एक सिरा ट्रैक्टर के पीछे तथा दूसरा सिरा गाड़ी के आगे फंसाया और खींच कर उसने हमारी गाड़ी निकाल दी। हमारे ड्राइवर बनवारी ने चैन की सांस ली। मैं ट्रैक्टर में बैठकर वहां तक गया जहां ट्रैक्टर ड्राइवर ने अपनी रेत भरी ट्राली खड़ी कर दी थी। बिना सहयोगी के वह ट्रैक्टर इंजन को ट्राली से जोड़ने में असमर्थ था इसलिए  वह मुझे वहां तक ले गया था। मैंने अपने मददगार को उसके इंजन से ट्राली जोड़ने में मदद की और संतोषजनक राशि देकर उसे संतुष्ट किया। वह बार-बार कहता रहा परिक्रमा वासियों की सेवा में बड़ा सुख है बाबूजी। मैं वहां से पैदल वापस आ गया।

अब मैं बाबाजी के शिविर पुनः गया। वहां निरुपमा मैकला एवं तिवारी बैठे मेरा इंतजार कर रहे थे। मैंने उन्हें गाड़ी निकलने की जानकारी दी तथा चलने को कहा। बाबाजी को प्रणाम किया कुछ द्रव्य उन्हें समर्पित कर हम आगे के परिक्रमा के लिए निकल गए।

हर हर नर्मदे

 

            क्रमशः

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