
मुंगेली। जिला मुख्यालय से लगभग 6 किमी दूर एक गांव है खेड़ा। खेड़ा गांव की आबादी लगभग 2000 है। ताजुब की बात यह है कि इस 2000 कि आबादी वाले गांव में सैकड़ों साल से किसी की भी मृत्यु साँप काटने से नहीं हुई है। जनश्रुति के अनुसार इस गाँव के लोगो को नागराज का वरदान है।
इसके पीछे की कहानी बड़ी रोचक है। खेड़ा गांव के बड़े बुजुर्गों के अनुसार सैकड़ों साल पहले गांव के मालगुजार के सपने में नागराज आए और उससे कहा कि मैं तुम्हारे गांव के तालाब किनारे पीपल के पास बैठा हूं। मेरे मुंह में मछली का काटां फंस गया है जिससे मेरे मुंह से खून निकल रहा है, उसे निकलवा दो। मालगुजार पहले तो इसे सपना समझकर किसी से कुछ नहीं कहा। पर अगले दिन फिर वो नागराज मालगुजार के सपने में आए और अपनी बात दुहराई।
इस बार मालगुजार अगली सुबह अपने परिवार और कुछ गांव वालों के साथ तालाब किनारे पीपल के पेड़ के पास गए। वहां सचमुच एक नागराज जिसके मुंह से खून निकल रहा था बैठा था। नागराज को देखकर सभी ने उसके मुंह से निकलते खून को देखा तो पता चला उसके मुंह में सचमुच मछली का काटा जैसा कुछ फंसा है। मालगुजार ने गांव के ही एक नाई की सहायता से उस नागराज के मुंह से काटा निकलवाया और सांप को छोड़ दिया।
इसके बाद नागराज फिर उसी मालगुजार के सपने में आए और कहा कि आप सबके कारण मेरी जान बची है, मैं आपसे बहुत प्रसन्न हूं और मैं आपके गांव को यह वरदान देता हूं कि आज के बाद इस गांव के लोगों की मृत्यु किसी सांप के डसने से नहीं होगी। कहा जा रहा है कि तब से आज तक इस गांव में सांप के काटने से किसी की मौत नहीं हुई है।
मालगुजार के परिवार के भागवत पांडेय ने भी इस बात की सत्यता की पुष्टि करते हुए कहा कि हमारे गाव के कई लोगों को जहरीला से जहरीला सर्प ने काटा है लेकिन उनमें से किसी की भी मृत्यु कभी नहीं हुई। यही कारण है कि सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी नागराज के इस वरदान के प्रति गांववालों की गहरी आस्था और विश्वास है।















