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कांग्रेस नेता माधव सिंह सोलंकी का नरेंद्र मोदी भी नहीं तोड़ पाए रिकॉर्ड, गुजरात में आज भी भाजपा का सपना ….

गांधीनगर। गुजरात में लगातार 27 सालों से सरकार चला रही भाजपा एक बार फिर यहां बहुमत हासिल करने के लिए पूरा दमखम लगा रही है। भाजपा इस बार ‘मिशन 150’ पर काम कर रही है और इस बार वह सपना पूरा कर लेना चाहती है, जिसका इंतजार पार्टी को दशकों से है। भगवा दल ने पिछले तीन दशकों में भले ही गुजरात को अपना सबसे बड़ा गढ़ बना लिया हो, लेकिन ‘सबसे बड़ी जीत’ के मामले में आज तक कांग्रेस का  रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाई। राज्य के इतिहास में कांग्रेस ने सर्वाधिक 149 सीटें जीतने का रिकॉर्ड 1985 में अपने नाम किया था, जबकि भाजपा का सर्वश्रेष्ठ 2002 में था। गुजरात दंगों के बाद हुए चुनाव में भाजपा ने 127 सीटों पर कब्जा किया था।

कांग्रेस पार्टी को इतनी बड़ी जीत जिस नेता ने दिलाई उनका नाम है माधव सिंह सोलंकी। 1985 में सोलंकी ने 182 सदस्यीय वाली विधानसभा में कांग्रेस को 149 सीटों पर जीत दिलाई। माधव सिंह सोलंकी ने वह कारनामा किया जिसे ना तो भाजपा और ना ही कांग्रेस दोहरा पाई। हालांकि, राज्य में भाजपा के उभार में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई।

दरअसल, 1981 में माधव सिंह सोलंकी ने जस्टिस बख्शी कमीशन की सिफारिश पर राज्य ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान किया तो राज्य में बड़े पैमाने पर कोटा विरोधी आंदोलन शुरू हो गए। हिंसक आंदोलन में सैकड़ों लोग मारे गए। आरक्षण समर्थक और विरोधी गुटबंदी के बीच सोलंकी ने 1985 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसी साल दोबारा हुए विधानसभा चुनाव में सोलंकी के लिए चार साल पहले चला गया दांव काम कर गया। उन्होंने 182 में से 149 सीटों पर जीत  हासिल की। हालांकि, पाटीदार समुदाय इसी दौरान कांग्रेस से नाराज हो गया और आगे चलकर इस प्रभावशाली समुदाय ने भाजपा की ओर अपना रुख किया।

गुजरात के गठन के बाद पहली बार जब 1960 में 132 सीटों पर विधानसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस को 112 सीटों पर जीत मिली। 1975 तक कांग्रेस लगातार सत्ता में काबिज रही। 1980 में जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद काग्रेस के माधव सिंह सोलंकी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 1990 में पहली बार भाजपा की एंट्री हुई और जनता दल के साथ मिली-जुली सरकार बनी। 1995 में भाजपा ने 182 में से 121 सीटों पर जीत हासिल करके पहले बहली बार केशुभाई पटेल के नेतृत्व में बहुमत हासिल किया। तबसे अब तक भाजपा लगातार यहां सत्ता में काबिज है। इस दौरान 2002 में सर्वाधिक 127 सीटें जीतीं तो सबसे कम 99 सीटों के साथ 2017 में सरकार बनाई थी।

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