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पर्यटन स्थलों में बिखरे पड़े खाली बोतल से समृद्ध होंगे पर्यटन समूहों के सदस्य, ग्रामीणों की बढ़ेगी आय …

रायपुर (गुणनिधि मिश्रा) । बस्तर के सुरम्य प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पर्यटन स्थल पर्यटकों की अधिक आवाजाही से गुलजार तो हो रहे हैं, लेकिन पर्यटकों द्वारा इन पर्यटन स्थलों में फैलाई जाने वाली गंदगी भी एक चुनौती बनकर उभर रही है।

बस्तर जिला प्रशासन ने जिले की इन प्राकृतिक धरोहरों को सुंदर बनाए रखने के लिए ऐसा कदम उठाया है कि पर्यटकों द्वारा फैलाई जाने वाली इन कचरे से भी पर्यटन समूहों के सदस्यों के लिए समृद्धि की नई राह खुले।

दरअसल बस्तर की सुंदरता को निहारने वाले पर्यटकों की आवाजाही पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गई है। इन पर्यटकों द्वारा बड़ी मात्रा में पानी एवं कोल्ड ड्रिंक्स का उपयोग किया जाता है और जाते समय इन खाली बोतलों को वहीं पर्यटन स्थलों में ही फेंक दिया जाता है। यहाँ-वहाँ फैले अनेकों प्रकार के बोतल पर्यटन स्थल की खूबसूरती को फीका कर देते है।

इन प्राकृतिक धरोहरों की सुंदरता कम न हो, इसके लिए जरुरी है कि लगातार इन कचरों के प्रबंधन का काम किया जाए। कचरों के प्रबंधन से पर्यटन समितियों के सदस्यों को अतिरिक्त आय हो, इसके लिए बस्तर जिला प्रशासन द्वारा चित्रकुट और तीरथगढ़ के पर्यटन समूहों को बोतल आर्ट एक्सपर्ट सुश्री मनीषा रंगारी के माध्यम से बोतल कला का प्रशिक्षण दिया गया और पानी और शीतल पेय के बोतलों को खूबसूरत रूप देना सिखाया गया। इन खूबसूरत बोतलों का उपयोग पौधे लगाने, पेन स्टैंड, नाईट लैंप, फ्लावर पॉट, गमले आदि के तौर पर किया जा सकता है।

जल्द ही बोतल कला से निर्मित बोतलों को पर्यटकों के समक्ष बिक्री हेतु उपलब्ध करवाया जाएगा जिनकी कीमत तीस रुपये से पाँच सौ रुपये होगी। बोतल आर्ट की ऑनलाइन डिमांड बहुत अधिक है और इनकी कीमत भी अच्छी है। बस्तर जिला प्रशासन के इस कदम से पर्यटन समिति के सदस्यों को आमदनी का एक नया जरिया मिलेगा वहीं दूसरी ओर पर्यटन स्थल पर कचरे का प्रबंध भी होगा। जल्द ही अन्य पर्यटन स्थलों में भी बोतल आर्ट कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

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