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दिल्ली दरबार : पंजाब कांग्रेस की राजनीति में फैला संक्रमण, असर राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर भी …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । पंजाब कांग्रेस की राजनीति में संक्रमण फैल रहा है जिसकी गूंज अब दिल्ली में भी सुनाई पड़ने लगी है। पर्दे के पीछे से राहुल गांधी डैमेड कंट्रोल करने सक्रिय हो गए हैं। जैसे जैसे पंजाब में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही है वैसे वैसे अब राज्य का सियासी पारा भी तेज चढ़ने लगा है। चुनाव आयोग भी कह चुका है कि चुनाव तय समय पर ही होंगे। आशय साफ है कि कोरोना की तीसरी लहर हो या चौथी, चुनाव नहीं टलेंगे भले ही बच्चों की परीक्षा टल जाए।

पंजाब कांग्रेस की कलह जब दिल्ली दरबार मे पहुंची तो स्वभाविक है कि राज्य में सत्तासीन पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है लेकिन ठीक कैसे होगा यह न तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पता है और न ही राज्य के सियासतदारों को। क्योंकि संक्रमण बहुत अंदर तक फैल गया है। मुख्यमंत्री अमरिंदर बनाम नवजोत सिंह सिद्दू में किसका पलड़ा भारी होगा यह तय कर पाना मुश्किल है। कांग्रेस ने केंद्रीय कमेटी का गठन कर मामले को सुलझाने की कोशिश जरूर की है लेकिन मामला सुलझता नहीं दिखाई पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री के खिलाफ न केवल नवजोत  खड़े हैं बल्कि कई और विधायक भी विरोध में खड़े हैं। साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यह तय था कि मुख्यमंत्री अमरिंदर ही बनेगे लेकिन कांग्रेस की जीत का श्रेय नवजोत सिंह सिद्दू भी लेना चाहते थे लेकिन आलाकमान ने उस समय बात नहीं मानी। जिसका खामियाजा यह हुआ कि पहले नवजोत कैबिनेट में शामिल हुए और बाद में इस्तीफा देने का नाटक भी चला। केंद्र में लगातार कमजोर होती जा रही कांग्रेस को झटका इसलिए भी लगा कि अमरिंदर सिंह अपने हिसाब से सरकार चलाते रहे और केंद्रीय नेतृत्व को नजरअंदाज किया।

दूसरी तरफ केंद्रीय नेतृत्व के सामने एक और दिक्कत है कि अगर पंजाब में कोई फेरबदल करते हैं तो उसका असर राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी दिखाई पड़ेगा। फिलहाल कांग्रेस आलाकमान पंजाब में हो रही आंतरिक गुटबाजी को दूर करने में लगा हुआ है।

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