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दिल्ली दरबार: अखिलेश ने मौका गंवाया और जितिन प्रसाद की भाजपा में हो गई इंट्री …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । कांग्रेस के युवा नेता जितिन प्रसाद की भाजपा में इंट्री तो हो गई है लेकिन कांग्रेस से ज्यादा बड़ा दुख उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को है।

दरअसल जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल होने से पहले अखिलेश यादव के भी संपर्क में थे। लेकिन जितिन प्रसाद की कुछ शर्तें अखिलेश यादव को मंजूर नहीं थी। लेकिन राजनीति के जानकार कहते हैं कि अखिलेश यादव अगर जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल कर लेते तो एक ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनको एक युवा साथी मिल जाता। अभी जो सपा में वर्तमान में ब्राह्मण नेता ​हैं जितिन प्रसाद का कद कहीं उनसे बड़ा है। लेकिन अखिलेश यह मौका चूक गए और जितिन प्रसाद भाजपा की शरण में चले गए। समाजवादी पार्टी में आज के दौर अखिलेश के अलावा दूसरी जाति का कोई बड़ा चेहरा नहीं है। ज​बकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने जब समाजवादी पार्टी का गठन किया तब उनके साथ जनेश्वर मिश्र, मोहन सिंह, रेवती रमण सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, आजम खान जैसे दूसरी जातियों के नेता साथ में जिसके दम पर पार्टी चुनाव जीतती रही है।

लेकिन वर्तमान में अखिलेश यादव के पास दूसरी जातियों का कोई बड़ा चेहरा नहीं है। आज स्थिति यह है कि हर जगह अखिलेश को पार्टी के लिए वोट मांगने की कवायद करनी पड़ रही है। अगर अखिलेश यादव जितिन प्रसाद जैसे युवा चेहरे को साथ में रखते तो शायद समाजवादी पार्टी और मजबूत होकर 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के विरोध में मजबूती से लड़ती।

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