
बार में हथियार लेकर घुसे तो ₹1 लाख जुर्माना! नई नियमावली पर अब तक नहीं हुआ फैसला
रांची
राज्य में बार में मारपीट, हथियार लहराने, गोली चलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए, कार्रवाई करने के लिए जो नियमावली बनी, उसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका।
करीब सात महीने पहले सात फरवरी को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने बार संचालन के लिए ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' का ड्राफ्ट स्टेक होल्डर्स व आम लोगों के लिए जारी किया था।
उक्त नियमावली पर सुझाव व आपत्तियां मंगाई गई थी, ताकि उसमें सुधार करते हुए संशोधित नियमावली को धरातल पर उतारा जा सके। सात महीने पूरे हो गए, लेकिन नियमावली धरातल पर नहीं उतारी जा सकी। अब भी राज्य में पुरानी नियमावली के तहत ही बार का संचालन हो रहा है। जो नियमावली बनी थी, वह फाइलों में ही रह गई।
प्रस्तावित नियमावली में यह उल्लेख है कि होटल, रेस्टोरेंट, बार परिसर में अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रवेश करने पर हथियार धारण करने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। स्टाक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं करने पर दस हजार, उसे अद्यतन नहीं भरने पर दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रविधान है।
बार में जाने वाले ग्राहकों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखकर नियमावली का प्रारूप बनाया गया था। नियम तोड़ने वाले बार संचालकों के लिए जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है। माप से कम शराब परोसने पर, गंदा परिसर रखने पर, निर्धारित आवाज से अधिक आवाज में म्यूजिक बजाने पर, नो स्मोकिंग जोन में स्मोकिंग करने पर भी जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है।
बार व रेस्तरा में शराब परोसने के लिए नियम व शर्तों को प्रभावी बनाया जाना था। इसी उद्देश्य से यह नियमावली प्रस्तावित थी, लेकिन अब तक उस नियमावली पर विचार नहीं किया जा सका।
तो पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसी जाती
राज्य में ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' लागू होती तो विभिन्न क्षेत्रों व होटलों में नियम के अनुसार शराब परोसने के समय निर्धारित होते। जैसे प्रस्तावित नियमावली में पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसे जाने का प्रविधान प्रस्तावित है।
वर्तमान में होटल हो या रेस्टोरेंट, हर तरह के बार में रात में 12 बजे तक ही शराब परोसने का प्रविधान किया गया है। नई नियमावली में सुरक्षा के जो प्रविधान प्रस्तावित हैं, वह पुरानी नियमावली में नहीं है।
सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही नई नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि, स्टेक होल्डर्स टैक्स के बिंदु पर आपत्ति जता चुके हैं, जिसपर विभाग को समीक्षा करना था। समीक्षा के बाद ही नियमावली पर आगे कोई निर्णय लिया जाना था। अब तक सभी बिंदुओं पर मामला लंबित है।

















