
नौकरीपेशा महिलाओं और छात्राओं को मिलेगी हॉस्टल सुविधा, बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर भी
रांची
नौकरी, रोजगार, उच्च शिक्षा या प्रशिक्षण के सिलसिले में अपने घर और परिवार से दूर रहने वाली महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की सखी निवास योजना महत्वपूर्ण सहारा बन रही है. इस योजना के तहत महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराया जा रहा है. झारखंड में भी इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. पहले चरण में राज्य के आठ जिलों को शामिल किया गया है. इनमें रांची, खूंटी, धनबाद, देवघर, बोकारो, गिरिडीह, सरायकेला-खरसावां और पलामू शामिल हैं. इन जिलों में उपलब्ध भवनों के आधार पर छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है.
मिशन शक्ति के तहत संचालित होती है योजना
सखी निवास योजना को पहले कामकाजी महिला छात्रावास योजना के नाम से जाना जाता था. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से इसे मिशन शक्ति के तहत संचालित किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी महिलाओं को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, जिन्हें नौकरी, रोजगार, व्यवसाय, प्रशिक्षण या पढ़ाई के कारण अपने परिवार से दूर दूसरे शहरों में रहना पड़ता है. खास बात यह है कि योजना में केवल नौकरीपेशा महिलाओं को ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं और रोजगार के लिए प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया है.
आठ जिलों में दो तरह से हो रहा संचाल
झारखंड में योजना के पहले चरण के तहत आठ जिलों में सखी निवास का संचालन शुरू करने की पहल की गयी है. इसके लिए भवनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग व्यवस्था की गयी है. रांची, खूंटी, धनबाद, देवघर और बोकारो में पहले से उपलब्ध सरकारी भवनों के माध्यम से छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है. वहीं, गिरिडीह, सरायकेला-खरसावां और पलामू में उपयुक्त सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी अथवा गैर-सरकारी भवनों को किराये पर लेकर संचालन की व्यवस्था की जा रही है.
योजना के क्रियान्वयन पर 94.50 लाख रुपये खर्च
योजना के क्रियान्वयन के लिए झारखंड सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 बजट में करीब 94.50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार ने इससे पहले इस योजना पर वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 82.00 लाख रुपये का प्रावधान किया था. यह केंद्र प्रायोजित योजना है. इसके तहत केंद्र सरकार 60% और झारखंड सरकार 40% राशि उपलब्ध कराती है. इस वित्तीय सहयोग से छात्रावासों के संचालन और महिलाओं को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है.
डे-केयर सेंटर की भी मिलेगी सुविधा
सखी निवास योजना की खासियत सिर्फ आवास उपलब्ध कराना नहीं है. इसमें कामकाजी महिलाओं के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए डे-केयर सेंटर यानी शिशु गृह की सुविधा भी शामिल है. इसका लाभ विशेष रूप से उन महिलाओं को मिल सकता है, जो नौकरी या अन्य रोजगार के साथ अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं. डे-केयर की सुविधा से महिलाओं को कामकाज के दौरान बच्चों की देखभाल को लेकर होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है. सुरक्षित आवास, बच्चों की देखभाल और किफायती रहने की व्यवस्था एक साथ उपलब्ध कराने का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना है.
कौन-कौन महिलाएं ले सकती हैं योजना का लाभ
इस योजना के दायरे में अविवाहित, विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परिवार से अलग रह रही कामकाजी महिलाएं शामिल हैं. ऐसी महिलाएं, जिनके पति या परिवार के सदस्य उनके कार्यस्थल वाले शहर में नहीं रहते हैं, वे भी निर्धारित शर्तों के अनुसार आवास की सुविधा प्राप्त कर सकती हैं. इसके अलावा नौकरी या व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं तथा उच्च शिक्षा हासिल करने वाली छात्राओं को भी योजना में जगह दी गयी है. हालांकि, छात्रावास में रहने के लिए निर्धारित पात्रता और आय संबंधी शर्तों को पूरा करना जरूरी है. आय सीमा के अनुसार महानगरों में रहने वाली महिलाओं की सकल मासिक आय 50 हजार रुपये और अन्य शहरों एवं क्षेत्रों में 35 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. योजना का उद्देश्य उन महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराना है, जिन्हें दूसरे शहरों में रहने के लिए सुरक्षित और किफायती स्थान की जरूरत है.
देशभर में 575 से अधिक सखी निवास संचालित
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 575 से अधिक सखी निवास संचालित हैं. इनके माध्यम से लगभग 29,608 महिलाएं लाभ उठा रही हैं. यह योजना उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिन्हें रोजगार और शिक्षा के अवसरों के लिए अपना शहर छोड़ना पड़ता है.
बड़े छात्रावास बनाने की भी तैयारी
झारखंड में भविष्य में इस योजना का विस्तार करने की संभावना है. राज्य के प्रमुख औद्योगिक और शहरी केंद्रों में 500-500 बेड की क्षमता वाले बड़े कामकाजी महिला छात्रावास बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया है. यदि यह प्रस्ताव धरातल पर उतरता है, तो राज्य में रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों से आने वाली महिलाओं को बड़ी राहत मिल सकती है.

















