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क्या है हाइब्रिड वॉर फेयर, जिसकी बात नरेंद्र मोदी और अजित डोभाल कर चुके हैं, जानें …

नई दिल्ली। भारतीय एयर चीफ मार्शल ने कहा है कि भविष्य में हम पर हर मोर्चे से हमला किया जा सकता है। आर्थिक तौर पर कमजोर करने से लेकर राजनयिक अलगाव, मिलिट्री स्टैंड-ऑफ आदि तक। ऐसे में हमें पूरी तरह से तैयार रहने की जरूरत है। इससे पहले नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर अजिल डोभाल और पीएम मोदी भी हाइब्रिड वॉरफेयर का जिक्र कर चुके हैं। आइए हाइब्रिड वॉरफेयर को समझने की कोशिश करते हैं।

हाइब्रिड वॉर को साफ सीधे परिभाषित नहीं किया जा सकता है। गलत सूचना, आर्थिक मैन्युप्लेशन, साइबर युद्ध, अनियमित युद्ध, जासूसी, छद्म तरीकों का इस्तेमाल, दूसरे देश में अशांति पैदा करने, कूटनीतिक दबाव जैसी तमाम चीजों को एक साथ किए जाने को हाइब्रिड वॉरफेयर कहा जा सकता है। मूल रूप से नॉन-स्टेट एक्टर्स की ओर से आधुनिक सैन्य क्षमताओं के साथ युद्ध करने को हाइब्रिड वॉरफेयर कहा जाता है। इस वॉर में डेटा बहुत बड़ा हथियार होता है। इसके तहत खुले तौर पर कोई जंग नहीं होती लेकिन डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि के जरिए किसी देश को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

1999 की शुरुआत में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा हाइब्रिड वॉरफेयर की एक रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी, जिसमें हाइब्रिड वॉरफेयर को दुश्मन को हारने के लिए संघर्ष को सैन्य क्षेत्र से हटाकर राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र तक ले जाने के रूप में परिभाषित किया गया था।

उदाहरण के तौर पर हम 2006 में हुए इजरायल-लेबनान युद्ध को ले सकते हैं। इस दौरान हिजबुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध, नई तकनीक और प्रचार माध्यमों का इस्तेमाल किया था। इस युद्ध के बाद ही अमेरिकी डिफेंस रिसर्चर फ्रैंक हॉफमैन ने 2007 में हाइब्रिड थ्रेट और हाइब्रिड वॉरफेयर टर्म का प्रयोग किया था।

साल 2014 में रूस द्वारा यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए हाइब्रिड वॉरफेयर का इस्तेमाल माना जाता है। इसमें दुष्प्रचार, आर्थिक जोड़-तोड़, आंतरिक विद्रोह और राजनयिक दबाव जैसी गतिविधियां शामिल थीं।

आधुनिक दौर में फ्रैंक जी. हॉफमैन को ही हाइब्रिड वॉरफेयर टर्म का जनक माना जाता रहा है। 2007 में प्रकाशित अपने एक रिसर्च पेपर ‘कनफ्लिक्ट इन द 21st सेंचुरी: द राइज ऑफ हाइब्रिड वॉर’ में उन्होंने इसकी पूरी अवधारणा के बारे में समझाया था। इसमें वह हाइब्रिड वॉरफेयर की शुरुआत और उसके विकास के बारे में बात करते हैं।

हाइब्रिड वॉर के तहत अफवाह, गलत जानकारी और फेक न्यूज फैलाई जाती है। लगातार ऐसा करते रहने से आम जनता की सोच प्रभावित करने की कोशिश होती है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में ऐसा करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान है। मौजूदा हालात में अब यह युद्धनीति का हिस्सा बनता जा रहा है।

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