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नए साधक योगाभ्यास से पूर्व सामान्य दिशा-निर्देश अवश्य जानें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया पूर्वाभ्यास

बिलासपुर। योग दिवस के अवसर पर टिकरापारा में 01 जून से चल रहे ऑनलाइन योग शिविर में आज 21 जून के सामान्य योग अभ्यासक्रम के अनुसार मंजू दीदी के संचालन में पूर्वाभ्यास किया गया। सभी मास्टर योग प्रशिक्षक बहनों ने प्रार्थना, संकल्प व शान्तिपाठ के साथ 45 मिनट के सभी अभ्यास किए। सोमवार 21 जून प्रातः 6.30 बजे से 8 बजे तक ‘‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’’ विषय पर यूट्यूब पर वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है जिसमें योगाभ्यास के साथ अन्य सामाजिक संस्थाओं के महानुभावों के प्रेरणादायी उद्बोधन व शुभकामनाएं भी शामिल होंगी जो हमें योगी जीवन के लिए प्रेरित करेंगी।

आज मंजू दीदी ने नए साधकों को योग से पूर्व तैयारी की बातें बताते हुए कही कि योग अभ्यास खाली पेट, ढ़ीले सूती वस्त्र पहनकर, खुले व शांत वातावरण में करना चाहिए। यदि अभ्यास के समय कमजोरी महसूस हो तो गुनगुने पानी में थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेना चाहिए। सीधे जमीन पर योगाभ्यास न कर चटाई, दरी, कम्बल अथवा योग मैट का प्रयोग करना चाहिए। थकावट, बीमारी, बढ़ी हुई श्वांसों की गति, जल्दबाजी एवं तनाव की स्थिति में योग न करें। जब तक आपको कहा न जाए श्वांस-प्रश्वांस की गति नहीं रोकनी चाहिए।

दीदी ने बतलाया कि अभ्यास से पूर्व, अभ्यास के समय व अभ्यास के बाद की ऐसी बहुत-सी बातें हैं जिसे नए साधकों को जानना जरूरी है। इसकी जानकारी के लिए शासन की ओर से दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। यह इन्टरनेट पर भी उपलब्ध है और पुस्तिका के रूप में टिकरापारा सेवाकेन्द्र से निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।

पितृ दिवस पर ऑनलाइन क्लास में सभी को अपने पिता के सहयोगी बनने व उनकी सेवा के लिए प्रेरित किया गया…

पितृ दिवस मनाने का उद्देश्य है कि इस दिन हम प्रेरणा लेकर पिता के कार्यों में सहयोगी बनने व उनकी सेवा करने का संकल्प लें। मां का त्याग और प्यार तो सभी के सामने प्रत्यक्ष होता है लेकिन पिता की मेहनत, उनकी भावनाएं, समर्पणता, त्याग व प्यार गुप्त रहता हैं। हम वर्तमान में जितनी भी ऊंची स्थिति में पहुंचे हैं, जो भी आनंद ले रहे हैं, सुखपूर्वक जी रहे हैं वह माता-पिता की दुआओं का ही परिणाम है।

आज के बच्चों को अनुरोध करते हुए दीदी ने कहा कि पिता को अकेले न छोड़ें, ज्यादा से ज्यादा उनके मददगार बनने की कोशिश करें, उन्हें अकेलेपन की महसूसता न होने दें। नैतिक मूल्य, समाज सेवा व देश सेवा की भावना वे बच्चे के अंदर भरते हैं। यदि आप अपने पिता से दूर रहते हैं तो कुछ पल ही सही पर उनसे रोज बात कर लिया करें। इतने से ही उन्हें खुशी मिल जाएगी। वर्तमान संगमयुग में सर्व आत्माओं के परमपिता परमात्मा शिव स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर अपने सभी बच्चों को विकारों के बंधन से छुड़ाकर सुख-शान्ति-समृद्धि प्रदान करते हैं। जो बच्चे उनकी श्रीमत पर चलते हैं उनका जीवन श्रेष्ठ बन जाता है।

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