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दिल्ली दलित बच्ची रेप केस मामले के सभी आरोपियों का नपुंसकता टेस्ट कराया गया, कपड़े और मोबाइल भी जब्त …

नई दिल्ली। पिछले कुछ सालों से भारत में दलितों पर अत्याचार तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमे सबसे अधिक रेप एंड मर्डर के मामले सामने आ रहे हैं। इसे रोक पाने में केंद्र व प्रदेश सरकार दोनों ही नाकाम हैं। पिछले दिनों यूपी में ही दलित समाज की एक मेधावी छात्रा का गैंगरेप कर प्रशासन के साये में देर रात परिजन की सहमति के बिना ही गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार करने का मामला सामने आया था। सरकार इस पर कुछ फैसला ले पाती इसके पहले ही एक के बाद एक नए केस होने लगे। अभी हाल ही में एक दलित बच्ची का दिल्ली केंट में रेप कर कब्रिस्तान ले जाकर शव जला दिया गया। मामले को लेकर देशभर के दलित समाज में उबाल आने के बाद पुलिस प्रशासन ने एक्शन लिया और आनन-फानन में केस दर्ज कर जरूरी कार्यवाही पूरी की और पीड़ित परिवार को पुलिस ने अब तक एफआईआर की कॉपी तक नहीं दी है।

दिल्ली कैंट के ओल्ड नांगल गांव के श्मशान घाट में कथित तौर पर नौ साल की दलित बच्ची के साथ कथित बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों का नपुंसकता टेस्ट (Potency Test) कराया है। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट को इस बारे में सूचित करते हुए बताया कि आरोपियों से हिरासत में पूछताछ के दौरान उनके अलग-अलग बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने यह भी कहा कि घटना के समय पहने हुए सभी आरोपियों के कपड़े और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं।

पुलिस ने कहा कि उनका पोटेंसी टेस्ट कराया गया है। पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि उसने मामले के कुछ गवाहों के बयान दर्ज किए हैं जिनमें मृतक की मां भी शामिल है। दिल्ली पुलिस की ओर से यह दलील तब आई जब पीड़िता के परिवार के सदस्य द्वारा दायर एक सुनवाई आवेदन में यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों की महिला पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना-2018 के तहत अंतरिम मुआवजे की मांग की गई थी।

अदालत ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को एक मृत दलित नाबालिग लड़की की मां को अंतरिम मुआवजा तुरंत जारी करने का निर्देश दिया, जिसकी कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। कोर्ट ने आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भी भेज दिया है।

दिल्ली की एक अदालत ने नौ साल की दलित लड़की से कथित बलात्कार और हत्या के मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों को सोमवार को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था।

पीड़ित परिवार की ओर से वकील जितेंद्र झा और सुरेश कुमार चौधरी, वकील पेश हुए। वकील ने कहा कि पीड़ित परिवार बेहद गरीब है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उन्हें एफआईआर की कॉपी भी नहीं दी है।

दिल्ली के ओल्ड नंगल श्मशान घाट में नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार, हत्या और उसके माता-पिता की सहमति के बिना अंतिम संस्कार करने का मामला जल्द जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने मामले को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे। हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मृतक नाबालिग लड़की के परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर परिवार को दस लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी।

पुलिस ने बताया कि 1 अगस्त को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में दिल्ली कैंट के पास एक श्मशान घाट के एक पुजारी और तीन कर्मचारियों ने नौ साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने नाबालिग की मां के बयान के आधार पर चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसने आरोप लगाया था कि उनकी सहमति के बिना उनकी बेटी के साथ बलात्कार, हत्या और अंतिम संस्कार किया गया।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 376 और 506 के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कोई व्यक्ति नपुंसक है या नहीं, इसका पता एक खास प्रकार के टेस्ट से लगाया जाता है। इस टेस्ट को पोटेंसी टेस्ट कहते हैं। कई बार बलात्कार के आरोपी खुद को नपुंसक बता कर बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कोर्ट के आदेश पर पुलिस आरोपी का पोटेंसी टेस्ट करवाती है।

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