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महाकाल मंदिर में भाजपाइयों की वजह से सालों से चली आ रही परंपरा टूटी, भस्म आरती में आधे घंटे की देरी, पंडितों ने जमकर मचाया हंगामा …

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित मशहूर महाकाल मंदिर में भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के वीआईपी दर्शन के बाद हंगामा मच गया है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि वीआईपी दर्शन की वजह से मंदिर की सालों से चली आ रही परंपरा टूट गई और भस्म आरती में देरी हुई है। मंदिर के मुख्य पुजारी अजय और संजय पुजारी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के वीआईपी दर्शन की वजह से मंदिर में सालों से चली आ रही भस्म आरती की टूटी है। उन्होंने कहा कि परंपरा टूटने से भारी अपशकुन हो गया है। भाजपा के नेता के वीआईपी दर्शन की वजह से यह आरती आधे घंटे देर से शुरू हुई। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय, उनके बेटे और भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय, बीजेपी विधायक रमेश मेन्डोला समेत अन्य लोगों की वजह से इस आरती में देरी हुई।

बताया जा रहा है कि वीआईपी नेताओं के मंदिर में आने के बाद अजय पंडित और संजय पुजारी को भी मंदिर के अंदर प्रवेश करने से रोका गया। मंदिर के पुजारी के मुताबिक विजयवर्गीय और कुछ अन्य लोगों ने सुबह करीब 3 बजे मंदिर में प्रवेश किया और गर्भगृह में जाकर पूजा-अर्चना की। नागपंचमी के अवसर पर इन लोगों ने दूध और पानी भी चढ़ाया। मंदिर प्रशासन ने इस दौरान मंदिर में प्रवेश के सभी द्वार बंद कर दिये और सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया।

मंदिर के मुख्य पुजारी अजय पंडित मंदिर के दरवाजे के बाहर खड़े थे और करीब 45 मिनट तक उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। पंडित का कहना है कि वीआईपी दर्शन ने मंदिर के प्रोटोकॉल को तोड़ा है। भस्म आरती, जो सुबह 4 बजे से 5 बजे के बीच में होनी थी वो 4.30 बजे शुरू हुई। चूकि बीजेपी के नेता पूजाकर रहे थे इसलिए आरती की तैयारी करने में देर हुई।  मंदिर प्रशासन ने वीआईपी मूवेंट को काफी गुप्त बना रखा था इसी वजह से मंदिर के सभी द्वार बंद थे। उन्होंने यह भी कहा कि ‘मैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर वीआईपी दर्शन के मुद्दे को हल करने के विषय में बातचीत करूंगा।’

भस्म आरती करने वाले संजय पुजारी ने भी कहा कि वीआईपी दर्शन का सिस्टम बेहद खराब है और इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। इधर इस पूरे मामले पर मंदिर के ऑफिसर-इंचार्ज दिनेश जायसवाल ने कहा कि ‘मुझे आदेश मिला था और मैं उसको फॉलो कर रहा था। मैं इसके अलावा इसपर और कुछ नहीं कह सकता।’ बता दें कि दिनेश जायसवाल के कहने पर ही मंदिर के दरवाजे बंद कर दिये गये थे। वहीं इस पूरे मामले पर कैलाश विजयवर्गीय ने बातचीत करने से इनकार कर दिया। वहीं रमेश मेन्डोला ने भी मीडिया के सवालों को नजरअंदाज कर दिया।

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