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मुंबई और मिनी मुंबई के बीच आर्थिक विकास की नई इबारत लिखेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे…

इंदौर। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे बनने से मुंबई की मिनी मुंबई यानी इंदौर से दूरी महज 4 घंटे की रह जाएगी. जबकि अभी इंदौर से मुम्बई पहुंचने में 11 घंटे से ज्यादा का समय लगता है. ऐसे में ये एक्सप्रेस वे एमपी के आर्थिक विकास की एक नई इबारत लिखेगा. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में विश्व के सबसे लम्बे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के निर्माण का जायजा लिया और 170 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही कार में थर्मस से चाय निकालकर भी पी.

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद बताया. मैंने हाइवे अथोरिटी के अधिकारियों को हिदायत दी थी कि यदि चलती कार में थर्मस से एक बूंद भी चाय गिरी, तो आप लोगों की खैर नहीं होगी. इस हाइवे को इतना स्मूथ बनाया गया है कि 120 किलोमीटर से ज्यादा की रफ्तार पर वाहन चल सकेंगे. 1380 किलोमीटर लम्बा 8 लेन वाला ये एक्सप्रेस वे मार्च 2023 में बनकर तैयार हो जाएगा. इस हाइवे के बनने से मुंबई और इंदौर के बीच 11 घंटे का समय घटकर 4 घंटे रह जाएगा. इससे दोनों आर्थिक राजधानियों के बीच व्यापार और आसान हो जाएगा. इससे मालवा के लोगों को रेडीमेड कपड़े, सराफा, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, फल-सब्जियों, अनाज का एक बहुत बड़ा बाजार मिल जाएगा.

कई मायनों में मिलेगी सहूलियत

इस एक्सप्रेस-वे के बनने से ट्रैफिक जाम खत्म होगा. साथ ही लॉजिस्टिक्स-ट्रांसपोर्टेशन लागत में भी कमी आएगी. इंदौर से मेडीकल हेल्प के लिए कई बार मरीजों को रेफर किया जाता है, अब ये और आसान हो जाएगा. 1350 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का अकेले मध्यप्रदेश में 8500 करोड़ की लागत से 8 लेन मार्ग बन रहा है. जरूरत पड़ने पर दूसरे फेज में इसे 12 लेन का बनाने का प्रस्ताव है.

विकास में मील का पत्थर

सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- मुझे खुशी है कि वर्ल्ड का यह सबसे बड़ा एक्सप्रेस हाईवे है. यह हमारे देश के लिए अभिमान का विषय है. दिल्ली से मुंबई हम 12 घंटे में पहुंच सकेंगे. इससे इंदौर के अलावा भोपाल, उज्जैन, जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, अहमदाबाद, सूरत जैसे शहरों तक आना-जाना आसान होगा. इसमें जगह- जगह हेलीपैड की भी व्यवस्था होगी, जिससे आकस्मिक स्थिति में किसी मरीज को एयर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा. कुल मिलाकार कहा जा सकता है कि ये हाइवे एमपी के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा.

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