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राष्ट्रीय अंडर 15 और जूनियर रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता में पिता का हाथ थाम दंगल में दम दिखा रहीं बेटियां …

नई दिल्ली। राष्ट्रीय अंडर 15 और जूनियर रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता शुक्रवार को रांची के मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में शुरू हुई। उद्घाटन भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने किया। पहले दिन अंडर 15 फ्रीस्टाइल में दिल्ली के पहलवानों ने चार स्वर्ण जीते। 169 अंक के साथ दिल्ली टीम विजेता रही। महाराष्ट्र 146 अंक के साथ दूसरे व यूपी 140 अंक ले तीसरे स्थान पर रहा।

झारखंड की राजधानी रांची में चल रही राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में इस बार बड़ा बदलाव दिखा। कई बालिका पहलवान ऐसी हैं जिनके पिता हौसला बढ़ाने हजारों किलोमीटर दूर चलकर रांची पहुंचे हैं। जब बेटी मैट पर उतरती है तो ये न सिर्फ उनकी जीत की दुआ करते हैं बल्कि चिल्ला-चिल्ला कर हौसला भी बढ़ाते हैं। बेटी जीती तो खुशी मनाते हैं और हार गई तो सांत्वना भी देते हैं।

इनमें से एक हैं हिमाचल प्रदेश के सोलन निवासी अमरीक चौधरी। वे बेटी प्रियंका के साथ आए हैं। उनके जैसे कई पिता हैं जो बेटी के साथ रांची पहुंचे हैं। इनमें पंजाब की आंचल के पिता अजय कुमार और सुमनदीप के पिता हरपिंदर सिंह भी हैं। इनका कहना है कि बेटियां जो करना चाहती हैं, उसमें उनका साथ देनाम समय की मांग है।

अमरीक ने बेटी को पहलवान बनाने के लिए टीम मैनेजर बनना स्वीकार नहीं किया। अमरीक को हिमाचल टीम का मैनेजर बनाया गया था, लेकिन बेटी को साथ ला रहे थे, इसलिए वे मैनेजर नहीं बने। अमरीक सरकारी स्कूल में पीटीआई हैं।

तीनों बच्चे एथलीट थे, लेकिन बड़ी बेटी प्रियंका ने जब से दगंल फिल्म देखी तो पहलवान बनने का शौक जाग गया। मैंने उसकी इच्छा का सम्मान किया और ट्रेनिंग की व्यवस्था की। वह पांच साल से कुश्ती सीख रही है। राज्य स्तर पर छह स्वर्ण जीत चुकी है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में साथ लेकर जाता हूं, ताकि उसका मनोबल बढ़ा रहे। प्रियंका कहती हैं कि पापा साथ होते हैं तो आत्मविश्वास बना रहता है।

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