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6 साल बाद फिर छोड़ा कांग्रेस का साथ, भाजपा में शामिल हुए कुलदीप बिश्नोई ….

चंडीगढ़। कांग्रेस के बुरे वक्त में साथ छोड़ने वालों में कुलदीप बिश्नोई ने अपना नाम दूसरी बार दर्ज करा लिया है। छह साल पहले भी वे कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे कुलदीप बिश्नोई ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। गुरुवार को उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। बुधवार को ही उन्होंने आदमपुर विधायक के तौर पर चंडीगढ़ से इस्तीफा दिया था। खास बात है कि कांग्रेस ने जून में ही उन्होंने निष्कासित कर दिया था। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग की थी।

कुलदीप बिश्नोई ने विधायक पद छोड़ने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया है। लंबी बगावत के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया था।  हाल ही में कांग्रेस में हुए फेरबदल के दौरान प्रदेश अध्यक्ष पद पर नाम को लेकर विचार नहीं करने के चलते वह बागी हो गए थे। खबर है कि उनके बेटे भव्य बिश्नोई आदमपुर सीट पर उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भाजपा मुख्यालय में उनका पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिश्नोई का आना संगठन की मदद करेगा। उन्होंने बताया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का समर्थन कर रहे थे और हाल के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस में रहते हुए भी भाजपा का समर्थन किया था।

इस दौरान आदमपुर के पूर्व विधायक ने भी पीएम मोदी की तारीफ की और कहा कि उन्हें ‘भारत का सबसे अच्छा प्रधानमंत्री’ कहना गलत नहीं होगा, जो हमेशा देश और गरीबों के कल्याण के बारे में सोचते हैं।

इधर, 10 जून को भी उन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी। उस चुनाव में कांग्रेस ने अजय माकन को उम्मीदवार बनाया था। जबकि, भाजपा और जननायक जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा की जीत हुई थी। इसके अगले ही दिन उन्हें पार्टी के सभी पदों से हटा दिया गया था।

हालांकि, बिश्नोई ने यह साफ किया है कि आदमपुर उपचुनाव में उम्मीदवार को लेकर भाजपा फैसला लेगी। उन्होंने कहा था कि वह और राज्य के लोग चाहते हैं कि बेटा भव्य चुनाव लड़े।

राज्य में कांग्रेस की जीत के बाद जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री पद के लिए तरजीह दी गई थी, तो साल 2007 में बिश्नोई और उनके पिता भजन लाल ने हरियाणा जनहित कांग्रेस लॉन्च की थी। खास बात है कि पार्टी को कुछ सफलता भी मिली, लेकिन अधिकांश विधायकों ने उनका साथ छोड़कर कांग्रेस का रुख कर लिया था। 2016 में बिश्नोई ने JHC का कांग्रेस में विलय कर लिया था।

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