मध्य प्रदेश

38 साल बाद भी कमलनाथ का पीछा नहीं छोड़ रहा सिख दंगे का भूत, इंदौर में विवाद के बाद भाजपा को मिला हमला करने का मौका, कमलनाथ ने राजनीति को ही बता दिया ‘टुच्ची’ ….

भोपाल। 38 साल पहले 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मध्यप्रदेश में प्रवेश से ठीक पहले इंदौर में हुए विवाद के बाद पूर्व सीएम और प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख कमलनाथ पर हमले करने का मौका मिल गया है। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ तो 1984 के सिख दंगों के आरोपी हैं। वे भारत जोड़ो यात्रा में कैसे शामिल हो सकते हैं? इसे कमलनाथ ने ‘टुच्ची राजनीति’ बताया और कहा कि मैं टुच्ची बातों और टुच्ची राजनीति पर बात नहीं करना चाहता।

दरअसल, इस विवाद की शुरुआत हाल ही में 9 नवंबर को इंदौर में हुई थी। प्रकाश पर्व यानी गुरुनानक जयंती पर कमल नाथ इंदौर में थे। गुरु नानक देव महाराज के प्रकाश पर्व के चलते वे इंदौर के खालसा कॉलेज में सजे दीवान के समक्ष मत्था टेकने पहुंचे थे। इस दौरान श्रीगुरु सिंघ सभा के पदाधिकारियों ने उन्हें सिरोपा भेंट किया था। कुछ देर रुकने के बाद जब कमल नाथ वहां से चले गए तो उन्हें सिरोपा भेंट करने की बात को लेकर विरोध शुरू हो गया। पंजाब से आए जाने-माने कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी ने 1984 के दंगों का मुद्दा उठाते हुए मंच पर ही माइक से कमलनाथ का विरोध कर दिया। उन्होंने पदाधिकारियों के सामने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो 1984 के दोषी हैं, तुम उनका गुणगान कैसे कर सकते हो। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मैं अब कभी इंदौर नहीं आऊंगा। इसके बाद महासचिव जसबीर सिंह गांधी ने कहा कि जो गलत होगा, वह आप भुगतेगा। विवाद पर सभा के प्रचार प्रमुख देवेंद्रसिंह गांधी ने कहा कि सामान्य घटना को तूल देकर राजनीति की जा रही है।

इस विवाद से भाजपा को बैठे-बिठाये मौका और मुद्दा भी मिल गया। भाजपा नेताओं ने इन कीर्तनकारों का न केवल स्वागत-सम्मान किया, बल्कि भारत जोड़ो यात्रा को लेकर हमले का बारूद भी बना लिया। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने तो इस घटना पर कहा था कि नेहरू परिवार और राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 1984 में सिखों पर हुए कांग्रेस नेताओं के अत्याचार पर उनका क्या मत है? राहुल गांधी को इंदौर आने से पहले यात्रा रोककर माफी मांगनी चाहिए। साथ ही दंगों के आरोपी रहे कमलनाथ को भी पार्टी से निकाल देना चाहिए। कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया ने उनसे इस मामले से जुड़े सवाल पूछ लिए। इस पर कमलनाथ ने कहा कि यह टुच्ची राजनीति है। मैं टुच्ची राजनीति न तो करता हूं और न ही ऐसा करने वालों के सवालों का जवाब ही देता हूं।

निर्दलीय शेरा सिंह को बनाया राहुल की यात्रा का प्रभारी

कमल नाथ 20 नवंबर को मध्यप्रदेश में बुरहानपुर के रास्ते प्रवेश कर रही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। यात्रा को लेकर कांग्रेस ने तमाम तैयारियां की हैं। निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को भी प्रभारी बनाया गया है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कमल नाथ ने कहा कि शेरा सिंह के दोनों भाई मेरे साथ संसद में रहे हैं। यदि शेरा के डीएनए में कांग्रेस है तो बीजेपी के पेट में क्यों दर्द हो रहा है?

कमल नाथ ने बीजेपी को भी यात्रा में आमंत्रित किया

भारत जोड़ो यात्रा में कमलनाथ ने बीजेपी को भी आमंत्रित किया है। इससे जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह सभी को आमंत्रित कर रहे हैं। अपने देश का तिरंगा उठाने में बीजेपी के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? भाजपा वाले और बाकी लोग भी आकर यात्रा में जुड़ें। यह ऐतिहासिक भारत जोड़ो यात्रा होगी। जितना जोश चुनाव में देखने को नहीं मिलता, उससे ज्यादा जोश यात्रा में दिख रहा है।

15 को छिंदवाड़ा में करेंगे बड़ा कार्यक्रम

प्रदेश सरकार की तरफ से 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस पर शहडोल में बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने और उसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित करने को लेकर कमलनाथ ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम करने दीजिए। मैं अपना कार्यक्रम करूंगा। उन्होंने बताया कि वह 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस पर छिंदवाड़ा में कार्यक्रम करेंगे।

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